छत्तीसगढ़

मृत्यु के बाद भी अमर रहती है मानव सेवा की भावना मराठापारा के दो नागरिकों ने जिला अस्पताल पहुंचकर की देहदान व नेत्रदान की घोषणा, समाज को दिया प्रेरणादायी संदेश


धमतरी(प्रखर) मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता केवल सांसों की गिनती तक सीमित नहीं होती, बल्कि जीवन के उपरांत भी यदि किसी का भला किया जा सके तो वही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। इसी महान सोच और मानवीय संवेदना के साथ मराठापारा क्षेत्र के दो जागरूक नागरिकों ने एक ऐसा निर्णय लिया है, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। मराठापारा निवासी मनीष राव पवार (उम्र 54 वर्ष) एवं संजय कुमार गायकवाड (उम्र 73 वर्ष), जो आपसी रिश्तेदारी में भाई लगते हैं, ने शुक्रवार को जिला अस्पताल पहुंचकर देहदान एवं नेत्रदान करने की औपचारिक घोषणा की।
दोनों नागरिकों ने अस्पताल में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए देहदान के लिए आवेदन पत्र भरा। इस दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद चिकित्सक, कर्मचारी एवं आम नागरिक भी उनके इस साहसिक और पुण्यकारी निर्णय से प्रभावित नजर आए। मीडिया से बातचीत करते हुए मनीष राव पवार और संजय कुमार गायकवाड ने कहा कि “मृत्यु के बाद शरीर पंचतत्व में विलीन हो जाता है और अंततः राख बन जाता है, जिससे किसी को कोई लाभ नहीं होता। लेकिन यदि वही शरीर चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान अथवा किसी गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्ति के उपचार में सहायक बन सके, तो इससे बड़ा पुण्य और मानव सेवा और कुछ नहीं हो सकती।”
उन्होंने बताया कि लंबे समय से उनके मन में यह विचार चल रहा था कि जीवन के बाद भी समाज के लिए कुछ ऐसा किया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियों को लाभ मिले। इसी सोच के तहत उन्होंने देहदान करने का संकल्प लिया। साथ ही दोनों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे नेत्रदान भी करेंगे, ताकि उनकी आंखें किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में उजाला ला सकें और किसी का संसार फिर से रोशन हो सके।
इस निर्णय में उनके परिवार का भी पूर्ण सहयोग मिला है। दोनों ने बताया कि उनकी पत्नियों ने न केवल इस निर्णय पर सहमति दी, बल्कि इसे गर्व का विषय बताया। परिवार की सहमति के साथ लिया गया यह कदम उनकी सामाजिक चेतना, परिपक्व सोच और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है।
जिला अस्पताल प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दोनों नागरिकों के इस निर्णय की प्रशंसा करते हुए कहा कि देहदान से मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है, जिससे भविष्य में बेहतर चिकित्सक तैयार होते हैं। वहीं नेत्रदान जैसे पुण्य कार्य से कई नेत्रहीन लोगों के जीवन में नई रोशनी आती है और उनका जीवन फिर से पटरी पर लौटता है।
मराठापारा के इन दो नागरिकों द्वारा उठाया गया यह सराहनीय कदम न केवल धमतरी जिले बल्कि पूरे अंचल के लिए एक उदाहरण है। उनका यह निर्णय समाज को यह संदेश देता है कि सच्ची मानव सेवा जीवन के बाद भी संभव है और प्रत्येक व्यक्ति यदि ऐसा संकल्प ले, तो समाज में सकारात्मक बदलाव अवश्य आएगा।

Author Desk

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