दान, पुण्य, सेवा और सामाजिक समरसता का महापर्व छेर-छेरा पुन्नी

निगम सभापति विजय मोटवानी ने नगरवासियों को दी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
ग्रामीण संस्कृति ही हमारी वास्तविक पहचान, इसे संरक्षित रखना हम सभी का नैतिक दायित्व : विजय मोटवानी
धमतरी(प्रखर) छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपरा एवं सामाजिक चेतना का प्रतीक छेर-छेरा पुन्नी पर्व पूस माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को श्रद्धा, विश्वास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से किसानों के जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। खेतों से फसल की कटाई पूर्ण होने के पश्चात जब किसान अन्न की मिजाई कर उसे कोठियों में सुरक्षित रखते हैं, तब कृतज्ञता, दान और पुण्य भाव के साथ छेर-छेरा पुन्नी पर्व मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को भी मजबूती प्रदान करता है।
इस पावन अवसर पर नगर निगम धमतरी के लोक निर्माण विभाग सभापति विजय मोटवानी ने नगर एवं ग्रामीण अंचल के समस्त नागरिकों को छेर-छेरा पुन्नी पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि दान, पुण्य और सेवा भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं, और छेर-छेरा पुन्नी पर्व इन्हीं मूल्यों को सहेजते हुए समाज को आपसी प्रेम, करुणा और सहयोग का संदेश देता है।
श्री मोटवानी ने कहा कि छेर-छेरा पुन्नी का पर्व “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयः” जैसे महान वैदिक विचार को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करता है। यह पर्व हमें यह प्रेरणा देता है कि समाज का हर वर्ग एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बने, जरूरतमंदों की सहायता करे और आपसी सौहार्द के साथ आगे बढ़े। इसी सामूहिक चेतना से एक सशक्त समाज, मजबूत राज्य और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव है।
उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण संस्कृति हमारी जड़ों से जुड़ी पहचान है, जो हमें हमारी परंपराओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्वों की याद दिलाती है। आधुनिकता की दौड़ में इन लोकपर्वों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। छेर-छेरा पुन्नी जैसे पर्व नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं और इन्हें जीवित रखना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है।
निगम सभापति श्री मोटवानी ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि इस पावन पर्व पर दान-पुण्य कर गरीब, असहाय एवं जरूरतमंद परिवारों की सहायता करें, ताकि समाज में कोई भी व्यक्ति अभाव में न रहे। उन्होंने कहा कि जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति एक-दूसरे के सहयोग से आगे बढ़ेगा, तभी छेर-छेरा पुन्नी पर्व की वास्तविक सार्थकता सिद्ध होगी।
अंत में उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक पर्वों और तीज-त्योहारों को प्रेम, श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता के साथ मनाते हुए सामाजिक एकता एवं भाईचारे को और अधिक मजबूत करें।



