5 लाख की इनामी महिला नक्सली भूमिका उर्फ गीता ने धमतरी SP कार्यालय में की आत्मसमर्पण

नक्सल उन्मूलन अभियान को मिली बड़ी सफलता
धमतरी(प्रखर) छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लागू की गई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति और धमतरी पुलिस की प्रभावी रणनीति से प्रभावित होकर 5 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली भूमिका उर्फ गीता ने आज धमतरी पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पहुंचकर विधिवत रूप से आत्मसमर्पण कर दिया। वह माओवादी संगठन में नगरी एरिया कमेटी की सदस्य तथा गोबरा एलओएस (लोकल ऑर्गेनाइजेशन स्क्वॉड) कमांडर के रूप में लंबे समय से सक्रिय थी और कई बड़ी नक्सली वारदातों में शामिल रही है।
पुलिस विभाग से मिली अधिकृत जानकारी के अनुसार आत्मसमर्पित नक्सली भूमिका उर्फ गीता उर्फ लता उर्फ सोमारी (उम्र 37 वर्ष), निवासी ग्राम पुसनार, थाना गुंगालुर, जिला बीजापुर ने आज दिनांक 06.01.2026 को पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र कुमार पांडेय के समक्ष समर्पण किया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा उससे पूछताछ की गई तथा उसके मुख्यधारा में लौटने के निर्णय की सराहना करते हुए शासन की नीति के तहत आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई।
माओवादी विचारधारा से मोहभंग बना समर्पण का कारण
आत्मसमर्पण के पश्चात भूमिका उर्फ गीता ने पुलिस के समक्ष बताया कि माओवादी संगठन की हिंसक गतिविधियों, आंतरिक भेदभाव और कठोर जीवनशैली से वह पूरी तरह निराश हो चुकी थी। लंबे समय तक संगठन में रहने के कारण उसे पारिवारिक, सामाजिक एवं दाम्पत्य जीवन से वंचित रहना पड़ा। संगठन के भीतर महिलाओं के साथ असमान व्यवहार, लगातार भय का माहौल, तथा आम नागरिकों के विरुद्ध की जाने वाली हिंसा से क्षुब्ध होकर उसने यह महसूस किया कि यह रास्ता सही नहीं है। इन्हीं कारणों से उसने हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का दृढ़ निर्णय लिया।
उसने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, जिसमें समर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, रोजगार, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य प्रदान करने का प्रावधान है, उससे वह अत्यधिक प्रभावित हुई। धमतरी पुलिस द्वारा लगातार चलाए जा रहे सिविक एक्शन कार्यक्रमों और व्यापक प्रचार-प्रसार ने भी उसके मन में भरोसा पैदा किया कि पुलिस एवं शासन उसकी सहायता करेंगे।
वर्ष 2005 से संगठन में रही सक्रिय
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक भूमिका उर्फ गीता लगभग दो दशक से माओवादी संगठन में कार्यरत रही है। वर्ष 2005 में वह माओवादी विचारधारा से प्रभावित होकर संगठन से जुड़ी थी। प्रारंभिक हथियार प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वह 2010 तक प्लाटून-01 में सदस्य रही। वर्ष 2010 में उसे उड़ीसा राज्य कमेटी में स्थानांतरित किया गया, जहाँ उसने विभिन्न जिम्मेदार पदों पर काम किया। वर्ष 2011 से 2019 तक वह सीसीएम (सेंट्रल कमेटी मेंबर) संग्राम की गार्ड के रूप में तैनात रही। इसके बाद 2019 से 2023 तक सीनापाली एरिया कमेटी में एसीएम के रूप में कार्य किया और सितंबर 2023 में उसे गोबरा एलओएस कमांडर का दायित्व सौंपा गया। वर्तमान में संगठन में सदस्यों की संख्या कम होने के कारण वह नगरी एवं सीतानदी एरिया कमेटी के साथ संयुक्त रूप से सक्रिय थी।
कई मुठभेड़ और नक्सली घटनाओं में रही है शामिल
आत्मसमर्पित महिला नक्सली भूमिका उर्फ गीता कई गंभीर नक्सली वारदातों और पुलिस मुठभेड़ों में भाग ले चुकी है। पुलिस द्वारा जारी विवरण के अनुसार –
वर्ष 2010 में ओडिशा के पड़कीपाली (जिला महासमुंद) में हुई मुठभेड़ में वह शामिल रही, जिसमें 08 नक्सली मारे गए थे।
वर्ष 2014 में मैनपुर के मोतिपानी जंगल में हुई मुठभेड़ में भी उसकी सक्रिय भूमिका रही।
वर्ष 2016 में नुआपाड़ा (ओडिशा) के कमलावाड़ी एवं पोतेलपाड़ा जंगल में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ों में उसने भाग लिया।
वर्ष 2018 में जिला बीजापुर के तिमेनार जंगल में हुई बड़ी मुठभेड़ में शामिल रही, जिसमें 08 नक्सली मारे गए थे।
वर्ष 2023 से 2025 के बीच गरियाबंद और धमतरी क्षेत्र के ताराझार, एकावरी, मांदागिरी एवं सेमरा जंगल में हुई विभिन्न मुठभेड़ों में वह लगातार सक्रिय रही है।
इन सभी घटनाओं के आधार पर उसके विरुद्ध अलग-अलग थानों में विभिन्न धाराओं के तहत अनेक आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। इनामी नक्सली होने के कारण शासन द्वारा उस पर 5 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।
धमतरी पुलिस के दबाव का दिखा असर
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हाल के समय में धमतरी जिले में नक्सलियों के विरुद्ध लगातार सर्च ऑपरेशन, प्रभावी घेराबंदी, जनजागरूकता अभियान, तथा ग्रामीणों के बीच विश्वास बहाली के लिए किए गए सिविक एक्शन कार्यक्रमों के चलते माओवादी संगठन पर भारी दबाव बना है। पोस्टर, बैनर एवं पंपलेट के माध्यम से नक्सलियों से समर्पण की अपील की जा रही थी, जिसका यह आत्मसमर्पण एक ठोस और सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई
माओवादी उन्मूलन अभियान के तहत पुलिस मुख्यालय के सतत मार्गदर्शन एवं रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री अमरेश कुमार मिश्रा के निर्देशन में यह आत्मसमर्पण प्रक्रिया पूरी कराई गई। पुलिस अधीक्षक धमतरी सूरज सिंह परिहार ने इसे जिले के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि धमतरी पुलिस का प्रयास है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर अधिक से अधिक भटके हुए लोग मुख्यधारा में लौटें।
प्रोत्साहन राशि प्रदान, पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू
आत्मसमर्पण करने पर छत्तीसगढ़ शासन की नीति के तहत महिला नक्सली भूमिका उर्फ गीता को तत्काल 50,000/- रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। इसके साथ ही उसके पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण और भविष्य में रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में विभागीय कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। पुलिस प्रशासन द्वारा उसे और उसके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने इस अवसर पर आम जनता से अपील की है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सुरक्षित भविष्य के लिए लोग पुलिस का सहयोग करें। यह आत्मसमर्पण इस बात का संकेत है कि शासन की पुनर्वास नीति और पुलिस की सकारात्मक पहल से नक्सलियों का विश्वास बढ़ रहा है तथा जिले में अमन-चैन की दिशा में माहौल मजबूत हो रहा है।



