छत्तीसगढ़

शराब घोटाला मामला: पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत


नई दिल्ली/रायपुर(प्रखर) शराब घोटाले के बहुचर्चित मामले में आरोपी छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री और वर्तमान विधायक कवासी लखमा को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने लखमा की ज़मानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें ज़मानत प्रदान कर दी। यह सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच में हुई, जिसमें करीब ढाई घंटे तक विस्तृत बहस चली।
लखमा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने की। वहीं, पूर्व मंत्री के वकील फैसल रिज़वी ने बताया कि कवासी लखमा को EOW-ACB और प्रवर्तन निदेशालय (ED) — दोनों के दर्ज मामलों में ज़मानत दी गई है। ज़मानत मिलने के बाद लखमा के कुछ ही दिनों में रिहा होने की संभावना है।
ज़मानत की शर्तें तय
सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत के साथ कुछ शर्तें भी लगाई हैं। इसके तहत कवासी लखमा को अपना पासपोर्ट जमा करना होगा। साथ ही उन्हें अपना मौजूदा पता और मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा।
15 जनवरी को हुई थी गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 15 जनवरी 2025 को कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उनसे सात दिनों तक रिमांड पर पूछताछ की गई। इसके पश्चात 21 जनवरी से 4 फरवरी तक उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। तब से वे रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। उल्लेखनीय है कि करीब दो महीने पहले कांग्रेस पार्टी ने जेल में बंद लखमा के इलाज में लापरवाही का आरोप भी लगाया था।
क्यों हुई थी कवासी लखमा की गिरफ्तारी
ED के अनुसार, कवासी लखमा कथित शराब सिंडिकेट के अहम हिस्सेदार थे। एजेंसी का दावा है कि सिंडिकेट उनके इशारे पर संचालित होता था और उन्होंने शराब कारोबार से जुड़े नेटवर्क को संरक्षण दिया। आरोप है कि शराब नीति में बदलाव कराने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। ED के मुताबिक, कवासी लखमा के कहने पर ही छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत की गई थी।
इसके अलावा, ED का यह भी आरोप है कि आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी होने के बावजूद कवासी लखमा ने उन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

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