छत्तीसगढ़

फसलचक्र परिवर्तन की नई राह पर धमतरी: दलहन, तिलहन और रागी से बढ़ रही किसानों की आय


धमतरी। जिले में खेती की पारंपरिक पद्धतियों में अब सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। धान आधारित खेती से आगे बढ़ते हुए किसान फसलचक्र परिवर्तन को अपना रहे हैं। दलहन, तिलहन और मोटे अनाज विशेषकर रागी की खेती को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ मिट्टी की सेहत में भी सुधार हो रहा है।
कृषि विभाग के मार्गदर्शन में किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। दलहन और तिलहन की फसलें जहां अतिरिक्त आय का स्रोत बन रही हैं, वहीं रागी जैसे पौष्टिक अनाज की बाजार में बढ़ती मांग किसानों को बेहतर दाम दिला रही है।
कृषि अधिकारी मोनेश साहू ने बताया कि लगातार एक ही फसल लेने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, जबकि फसलचक्र अपनाने से जमीन की पोषक क्षमता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि दलहन फसलें भूमि में नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर प्राकृतिक रूप से उर्वरता बढ़ाती हैं, जिससे रासायनिक खाद की आवश्यकता कम होती है और लागत घटती है। तिलहन एवं मोटे अनाज की खेती कम पानी में भी संभव है, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने आगे बताया कि विभाग द्वारा किसानों को प्रशिक्षण, उन्नत बीज और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। महिला स्व-सहायता समूहों को भी रागी सहित अन्य फसलों के प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ा जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी और आय में वृद्धि हो रही है।
फसलचक्र परिवर्तन की यह पहल धमतरी जिले में टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है, जिससे किसान आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिल रहा है।

Author Desk

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