छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की माताश्री की पुण्य स्मृति में शांति हवन और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

बिलासपुर / छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की माताश्री स्वर्गीय श्रीमती कुसुम सिन्हा (10 जुलाई 1942 – 15 फरवरी 2026) की पुण्य स्मृति में 18 फरवरी 2026 को सायं 5:00 बजे से 6:30 बजे तक उनके शासकीय आवास, उच्च न्यायालय आवासीय परिसर, बोदरी, बिलासपुर में श्रद्धांजलि एवं शांति हवन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में न्यायपालिका, प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान से शांति हवन के साथ हुई। इसके पश्चात भजन संध्या और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थितजनों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए मौन रखकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरे परिसर में श्रद्धा, संवेदना और आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त रहा।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने अपनी माताश्री के जीवन, उनके सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, उच्च संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों को भावुक शब्दों में स्मरण किया। उन्होंने कहा कि माताजी का स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी रहे हैं। उनसे मिली सीख—कर्तव्यनिष्ठा, सत्यनिष्ठा और सेवा भाव—ने उन्हें जीवन के हर चरण में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि माताजी की स्मृतियां सदैव शक्ति और संबल प्रदान करती रहेंगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्री तोखन साहू, गजेंद्र यादव सहित उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, महाधिवक्ता, पुलिस महानिदेशक, उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एवं सचिव, वरिष्ठ अधिवक्ता, प्रशासन एवं पुलिस विभाग के अधिकारी, रजिस्ट्रार जनरल एवं रजिस्ट्री के अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायिक अधिकारी, जिला न्यायपालिका के अधिकारी-कर्मचारी और अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
उपस्थित वक्ताओं ने स्वर्गीय श्रीमती कुसुम सिन्हा के आदर्श जीवन, सरलता और पारिवारिक समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन गरिमामय एवं भावनात्मक वातावरण में संपन्न हुआ, जहां सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को इस दुख की घड़ी में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।



