राष्ट्रपति के अपमान की आदिवासी समाज ने की निंदा, ममता बनर्जी से सार्वजनिक माफी की मांग

धमतरी। गोंडवाना गोंड महासभा छत्तीसगढ़ ने 7 मार्च को पश्चिम बंगाल में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ हुए कथित अपमान की कड़ी निंदा की है। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष और केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम ने कहा कि इस तरह की घटना लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
नीलकंठ टेकाम ने कहा कि राष्ट्रपति देश की प्रथम नागरिक होती हैं और उनका सम्मान पूरे देश का सम्मान है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के स्वागत के दौरान प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, जो गंभीर विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
टेकाम ने यह भी कहा कि कार्यक्रम स्थल को अंतिम समय में बदलकर छोटे स्थान पर आयोजित किए जाने से कई आदिवासी समुदाय के लोग राष्ट्रपति के संबोधन से वंचित रह गए। उनका कहना है कि इससे आदिवासी समाज में नाराजगी है।
उन्होंने कहा कि देश में पहली बार एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति के पद पर आसीन हुई हैं, जो पूरे आदिवासी समाज के लिए गर्व की बात है। ऐसे में उनके साथ किसी भी प्रकार का अनादर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
गोंडवाना गोंड महासभा के कई पदाधिकारियों और सदस्यों ने भी इस घटना की निंदा करते हुए राष्ट्रपति के सम्मान की रक्षा करने की बात कही।



