छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ महतारी काली मंदिर परिसर कुरूद में चैत्र नवरात्रि मेला: मीना बाजार बना आकर्षण का केंद्र, उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़


कुरूद(प्रखर) चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर कुरूद स्थित छत्तीसगढ़ महतारी काली मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला भव्य मेला इस वर्ष भी पूरे उत्साह और उल्लास के साथ प्रारंभ हो गया है। रविवार संध्या को विधिवत पूजा-अर्चना के साथ मेले का शुभारंभ किया गया, जिसके बाद से ही नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। इस बार मेले में विशेष आकर्षण के रूप में सजा मीना बाजार और आधुनिक झूलों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
करीब तीन दशकों से आयोजित हो रहा यह मेला अब प्रदेशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है। हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक मेले का आनंद लेने कुरूद पहुंच रहे हैं। सोमवार पंचमी से ही छत्तीसगढ़ महतारी काली मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई हैं। भक्तजन मंदिर में ज्योति कलश प्रज्वलित कर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कर रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो गया है।
इस वर्ष मेले में मीना बाजार की विशेष सजावट और विविध मनोरंजन साधनों ने आकर्षण को कई गुना बढ़ा दिया है। मीना बाजार के संचालक छोटेलाल सिन्हा के अनुसार इस बार जलपरी शो, भूत बंगला, ऑक्टोपस झूला, टोरा-टोरा, हवाई झूला, सुपर ड्रैगन, ब्रेकडांस, मिक्की माउस, टाइटैनिक, रेंजर झूला, बेबी झूला, ट्रेन सालंबो, मौत का कुआं, मोटर बोट, मोटरसाइकिल धूम और स्कॉर्पियो धूम जैसे रोमांचक साधन शामिल किए गए हैं, जो बच्चों से लेकर युवाओं तक सभी को आकर्षित कर रहे हैं। इन झूलों और खेल-तमाशों के चलते मेले में हर उम्र के लोगों के लिए मनोरंजन के भरपूर साधन उपलब्ध हैं।
इसके साथ ही विभिन्न राज्यों से आए व्यापारियों द्वारा सजाई गई आकर्षक दुकानों ने मेले की रौनक में चार चांद लगा दिए हैं। खिलौने, घरेलू सामान, सजावटी वस्तुएं और खानपान की दुकानों पर लोगों की खासी भीड़ देखी जा रही है।
नगर के प्रमुख देवी मंदिरों—मां चंडी मंदिर, जय महाकाली छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर और मां शीतला मंदिर—में मनोकामना ज्योति प्रज्वलित कर श्रद्धालु अपनी आस्था व्यक्त कर रहे हैं। मंदिरों में जसगीत और भक्ति की अविरल धारा बह रही है, जिससे पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है।
हालांकि, पिछले दो-तीन वर्षों से स्थानाभाव के कारण मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं हो पा रहा है, जिससे संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेने वाले लोगों में कुछ निराशा भी देखने को मिल रही है। बावजूद इसके, मेले की भव्यता, आस्था और मनोरंजन का संगम लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
कुल मिलाकर, कुरूद का यह चैत्र नवरात्रि मेला श्रद्धा, परंपरा और आधुनिक मनोरंजन का अद्भुत संगम बनकर क्षेत्रवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और मेले की रौनक यह दर्शाती है कि यह आयोजन आने वाले दिनों में और भी भव्य रूप लेगा।

Author Desk

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