विपक्ष के हंगामे के बीच सदन में गूंजा महिला आरक्षण, सीएम साय ने पेश किया शासकीय संकल्प प्रस्ताव

विपक्ष के हंगामे के बीच सदन में गूंजा महिला आरक्षण, सीएम साय ने पेश किया शासकीय संकल्प प्रस्ताव
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए शासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश किया। आंसदी ने चर्चा के लिए 4 घण्टे का समय निर्धारित किया। मुख्यमंत्री साय के प्रस्ताव के बाद नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत अशासकीय संकल्प प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे आसंदी ने अग्राह्य कर दिया। इस पर डॉ. महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री तो निंदा प्रस्ताव लाने वाले थे, लेकिन यह शासकीय संकल्प प्रस्ताव तो निंदा पर नहीं है। शासकीय संकल्प के विषय को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई। विपक्ष ने कहा- सदन के बाहर निंदा प्रस्ताव की बात कही गई, अब शासकीय संकल्प लाकर चर्चा कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा में शासकीय संकल्प पर हंगामेदार चर्चा जारी रही।
भाजपा के लिए महिला सशक्तिकरण राष्ट्र निर्माण : लता उसेंडी
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक लता उसेंडी ने कहा कि महिला आरक्षण पर रुकावट बनने का काम विपक्ष ने किया। महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में गिराने का काम विपक्ष ने किया। महिलाओं की भावनाओं और सम्मान का ख्याल नहीं रखा गया। लता उसेंडी ने कहा विपक्ष ने कागजों में महिला आरक्षण बिल लाया। मोदी सरकार ने संसद से इसे पारित कराने का काम किया। कांग्रेस के लिए महिला सशक्तिकरण सिर्फ नारेबाजी है। भाजपा के लिए महिला सशक्तिकरण राष्ट्र निर्माण है।
दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि
छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र की कार्रवाई की शुरुआत राष्ट्रगीत और राजगीत के साथ हुई। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने निधन सूचना दी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पूर्व सदस्यों के निधन की सूचना दी। पूर्व सांसद मोहसीना किदवई, पूर्व विधायक जगेश्वर भगत के निधन की सूचना उन्होंने दी। सदन ने दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही दिवंगतों के सम्मान में सदन की कार्रवाई 5 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। विधानसभा की कार्रवाई पांच मिनट के बाद फिर से शुरू हो गई।
विपक्ष का संकल्प हुआ अग्राह्य, महंत ने कहा गुमराह कर रहे
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा में आज शासकीय संकल्प पेश किया। उन्होंने महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने का संकल्प पेश किया। इस पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा हमने महिला सशक्तिकरण के संबंध में संकल्प पेश किया है। उन्होंने वर्तमान स्थिति में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का अशासकीय संकल्प पेश किया है। इस पर स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने अशासकीय संकल्प को अग्राह्य कर दिया। इस पर डॉ. महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री तो निंदा प्रस्ताव लाने वाले थे, लेकिन यह शासकीय संकल्प प्रस्ताव तो निंदा पर नहीं है। इसके साथ ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सदन के बाहर और अंदर सत्ता पक्ष की ओर से महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है।
वर्तमान सीटों पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए : अनिल भेडिय़ा
विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष की ओर से पूर्व मंत्री अनिला भेडिय़ा ने कहा कांग्रेस 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के पक्ष में है। वर्तमान सीटों पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए। उन्होंने कहा भाजपा की हिम्मत 543 सीटों पर 33 प्रतिशत आरक्षण देने की नहीं है। महिलाएं इसका बदला भाजपा से जरूर लेंगी। महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं पर अपनी बात रखते हुए अनिला भेंडिया ने कहा महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहा है। महिलाओं के साथ अत्याचार पर भाजपा के लोग कुछ नहीं कहते। क्या भाजपा नेताओं के मुंह पर टेप लग जाता है। कांग्रेस का पक्ष रखते हुए अनिला भेडिय़ा ने कहा कि महिला आरक्षण का कांग्रेस समर्थन करती है। महिला आरक्षण 2029 में लागू किया जाना चाहिए। 2023 में बिल पारित है। इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए. जिन्होंने नारी का अपमान किया उसका विनाश हुआ है। रामायण में माता सीता का हरण और रावण का विनाश नारी अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा और सम्मान का उदाहरण है।
अनिला भेंडिया के बयान पर भावना बोहरा ने पलटवार किया। विधायक भावना बोहरा ने कहा कांग्रेस सरकार में महिलाओं पर अत्याचार पर मुंह में टेप लग जाता था। अरुण साव ने कहा कांग्रेस सरकार में 500 रुपए देने की बात हुई एक बार भी महिलाओं को राशि नहीं दी गई क्या महिलाओं की बात करेंगे।
विधानसभा में महिलाओं की संख्या पर बहस
सदन में महिलाओं की संख्या पर दोनों पक्षों में काफी बहस हुई। विपक्ष के विधायकों ने कहा कांग्रेस ने महिलाओं को अवसर दिया है। भाजपा के 54 में 8 और कांग्रेस से 35 में 11 महिला विधायक हैं। कांग्रेस ने वास्तव में महिलाओं को अवसर प्रदान किया। इसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष की महिलाओं के बीच तीखी बहस होने लगी।
महिलाओं को राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए :
छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र की कार्रवाई को देखने के लिए प्रदेशभर से बड़ी संख्या में महिलाएं राजधानी पहुंचीं। विभिन्न जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों से आई महिलाओं में इस विशेष सत्र को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। दर्शक दीर्घा में बैठकर उन्होंने सदन की कार्यवाही को गंभीरता से देखा और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा को सुना। इस दौरान कई महिला जनप्रतिनिधि भी विधानसभा पहुंचीं और उन्होंने सदन की कार्यवाही का अवलोकन किया। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस विशेष सत्र को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।
महिला जनप्रतिनिधियों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिला आरक्षण से जुड़े बिल के पारित न हो पाने से प्रदेशभर में नाराजगी का माहौल है। उनका कहना है कि विपक्ष के रुख के कारण यह महत्वपूर्ण बिल आगे नहीं बढ़ सका, जिससे महिलाओं में आक्रोश देखने को मिल रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और इसके लिए महिला आरक्षण बिल का पारित होना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि इस बिल के लागू होने से महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक भागीदारी मिलेगी और समाज में उनकी स्थिति और सशक्त होगी। महिलाओं ने उम्मीद जताई कि भविष्य में इस दिशा में सकारात्मक पहल होगी और महिला सशक्तिकरण को मजबूती देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।



