जीभ को स्वाद चखाने उपवास खत्म होने का इंतजार करते हो इसकी कीमत शरीर को चुकानी पड़ेगी : साध्वी शुभंकरा श्रीजी

रायपुर। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में मंगलवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि अगर आपका सूर्योदय अच्छा है तो आपका दिन भी अच्छा होगा। आपको दिन अच्छा रखना है तो आहार भी समय पर ग्रहण करना होगा। यह संस्कार आदिकाल से बने हुए हैं लेकिन आप लोग केवल इसका अनुसरण 4 महीने ही करते हैं। सिर्फ कुछ दिनों का धर्म करके आपको लगता है कि आपने साल भर का पूजन कर लिया है।
साध्वीजी कहती है कि लोग चातुर्मास में प्रवचन का श्रवण करने जाते हैं। प्रवचन स्थल आने से पहले आप घर के सभी काम करके आते हो। नाश्ता करना, बाजार से खरीदी करना और बाकी अन्य काम करके आपमें प्रवचन स्थल पहुंचने की स्फूर्ति बनी रहती है। इन चार महीनों के दौरान जिस दिन प्रवचन नहीं होता उस दिन आप का भी काम में मन नहीं लगता और सारे कार्य धीमी गति से चल रहे होते हैं।
साध्वीजी चातुर्मास के दौरान आप बहुत संकल्प लेते हो और उपवास करते हो लेकिन जैसे-जैसे संकल्प खत्म होने का समय पास आता है, आपको मन पसंद सपने आने लगते हैं। आप सोचने लगते हो कि संकल्प खत्म होने के बाद हम इस होटल में खाना खाएंगे उस रेस्टोरेंट में जाकर वह डिश खाएंगे। आपके मन में विकल्प शुरू हो जाते है। मनुष्य अपने जीवन का अच्छा भी कर सकता है और सब कबाड़ा भी, यह सब उसी के हाथ में हैं। मनुष्य अपने मन को नहीं संभाल सकता, उसका मनपसंद नाश्ता आ गया तो उसका मन मचल उठता है। हमें तो केवल पेट भरना है, मात्र ढाई इंच के जीभ के स्वाद के लिए हमें खाना नहीं खाना है। यह जीभ खाने के वक्त ऐसा लपालपाता है जैसे कि इसे दोबारा कभी खाने को मिलेगा ही नहीं। और जब भुगतने का टाइम आता है तो शरीर को उसकी कीमत चुकानी पड़ती है, जीभ को कोई फर्क नहीं पड़ता। आज आप संकल्प लीजिए कि खाने में ऊपर से नमक नहीं लेंगे।
जबकि आपको जो मिले वह खा लेना चाहिए। आपको यह विचार करना चाहिए कि आज कितने लोगों को खाना नहीं मिला है और वह भूखे ही सो गए। खाना खाने में नखरा दिखाओगे तो प्रकृति आपके शरीर के साथ नखरे करने लगेगी। आपको हाथ जोड़कर दोनों समय का भोजन करना चाहिए यह सब के नसीब में नहीं होता है। आज आपको आपके मन मुताबिक ठंडा-गरम, कम-ज्यादा खाने को सब मिलता है, साथ में अचार, पापड़, सब्जी, घी, सलाद सब मिलता है। जब गाय-बैल, हाथी-घोड़े बन जाओगे तो जो मिला बचा खुचा, बासी, ठंडा, खराब भोजन वह खाना पड़ेगा। आपको यह चिंतन करना होगा कि आपको पहले क्या मिला और आज क्या मिल रहा है और आने वाले समय में क्या मिलने वाला है। आज आपको जो मिल रहा है उसकी आपको कदर करनी चाहिए।



