समुद्र में खोई हुई अंगूठी को ढूंढकर वापस लाया जा सकता है लेकिन एक बार मानव जीवन खोया तो वह फिर नहीं मिलेगा : साध्वी शुभंकरा श्रीजी

रायपुर। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में गुरुवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि आज बड़ों को पैसों का और बच्चों को चॉकलेट का लालच देकर आप उनसे कोई भी काम करवा सकते हैं। मन में लालच हो तो आदमी कुछ भी कर सकता है। आप अपने से बड़े और छोटों को उनकी मनपसंदीदा चीज देकर कोई भी काम करवाना चाहोगे तो यह भी उचित नहीं होगा। यह न्यायोचित तब होगा जब आप सत्कर्म के लिए इस अपनों पर प्रयोग करोगे। सत्संग में आने वालों को लगता है कि यह प्रवचन दूसरों के लिए लागू होता है लेकिन प्रवचन को आप अपने जीवन पर आधारित करके सुनोगे तो आप का कल्याण हो जाएगा।
साध्वीजी ने आगे कहा कि हम लाइफ मैनेजमेंट के साथ-साथ फूड मैनेजमेंट के विषय में चर्चा कर रहे हैं। साध्वीजी कहती है कि आपको सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बीच ही भोजन करना चाहिए। गर्मी के दिनों में यह समय काल 12 घंटे का होता है और ठंड के समय वह 10 से 11 घंटे का हो जाता है। मनुष्य जीवन पाने वाले के दोनों हाथ में लड्डू है वह जब चाहे तब मनपसंद भोजन कर सकता है। इस भोजन चक्र के बीच आपको अपने शरीर को स्वस्थ भी रखना है और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आपको सभी कामों का टाइम सेट करना होगा। आज जितने भी लोग प्रवचन सुनने आते हैं उनके दिन भर का समय सेट होता है। क्योंकि प्रवचन सुबह 8:45 को शुरू हो जाता है तो उन्हें आने से पहले भी तैयारी करनी पड़ती है और यहां से जाकर भी उन्हें अपने दिन भर का काम करना होता है। आज प्रवचन सुनने कोई ऑटो से आता है, किसी को घर वाले छोड़कर जाते है, कोई कार से आता है तो कोई स्कूटी से आता है। जिनवाणी का श्रवण करने के लिए मन में श्रद्धा होनी चाहिए, सत्संग में जाने की इच्छा होनी चाहिए। आप सभी यहां सत्संग में आते है, पर वह लोग नहीं आते जिन्हें वास्तव में जिनवाणी सुननी चाहिए। हां हम बच्चों की बात कर रहे हैं उनका मन नहीं लगता लेकिन अगर आप उन कहेंगे कि चलो मुझे छोड़कर ही आ जाओ और मंदिर के दर्शन कर लेना तो भी प्रभु के दर्शन मात्र से उनके जीवन का कल्याण सकता है।
साध्वीजी कहती है कि आज बहुत से लोग सुबह 10 से 11 बजे के बीच उठते हैं, उनके जीवन का कल्याण होना बहुत मुश्किल है। प्रवचन सुनना भी उनके लिए बहुत दूर की बात है। लोग घर में आराम करके खुद को चार्ज करना सोचते हैं। 24 घंटे में आपका कितना समय व्यर्थ जा रहा है इसका कोई हिसाब किताब नहीं रखता है लेकिन अगर आपके काम के लिए 10 रुपए भी खर्च हो जाए तो वह आपको बहुत अखरता है और उसका आप हिसाब किताब करते हैं। कल्पना कीजिए कि आप किसी जहाज से जा रहे हैं और समुद्र के बीचो-बीच आपके हीरे की अंगूठी गिर जाती है तो उसके मिलने की संभावना बहुत ही दुर्लभ होती है। इसी से समझा जा सकता है कि मानव जीवन उस अंगूठी के मिलने की संभावना से भी बहुत ही दुर्लभ है। एक बार उस हीरे की अंगूठी को खोजा जा सकता है उसे वापस पाया जा सकता है पर मानव जीवन को कभी वापस नहीं पाया जा सकता है।