निद्रा हमें चार्ज करती है, आहार हमें पेट्रोल देता है और जब तक आप गाड़ी में पेट्रोल नहीं डालोगे तो वह चलेगी कैसे : साध्वी शुभंकरा श्रीजी

रायपुर। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में शुक्रवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि गुरु महाराज के चरणो में जब आपको आनंद आने लगे तो समझ लेना आप का कल्याण हो चुका है। पिछले प्रसंग में आपने सुना कि कैसे कुसंगतियों में रहने वाला व्यक्ति गुरु भगवान के वाणी का श्रवण करें अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आता है। कोई भी आपको गुरु महाराज के पास चलने बोले तो आप कभी मना मत करना। गुरु भगवान को सुनते-सुनते कब कौन सा वाक्य, कौन सा शब्द आपके जीवन को प्रभावित कर कल्याण की दिशा में ले जा सकता है, यह आपको समझ में भी नहीं आएगा।
साध्वीजी ने कहा की हम जब जागे तो प्रसन्नता के साथ जागे। निद्रा हमें चार्ज करती है, आहार हमें पेट्रोल देता है और जब तक आप गाड़ी में पेट्रोल नहीं डालोगे तो वह चलेगी कैसे। आदिकाल से हम सूर्य देव को मानते आ रहे हैं। बौद्धिक सभ्यता में सूर्य नमस्कार का बहुत बड़ा महत्व है और आज भी हम सूर्य नमस्कार करने में पीछे नहीं है। आहार ग्रहण करने का सबसे उचित समय सूर्योदय के 48 मिनट बाद है और सूर्य अस्त के बाद हमें एक बूंद पानी भी नहीं पीना चाहिए।
साध्वीजी ने बताया कि जैन सिद्धांत में रात्रि भोजन का त्याग करने के बात हम वर्षों से करते आ रहे हैं। सूर्य के प्रकाश में इतनी ताकत है कि वह सूक्ष्म जंतुओं का प्रकोप हम पर नहीं पढ़ने देता है। सूर्य के प्रकाश से आप कई बीमारियों से बच सकते हैं। सूर्य का प्रकाश हमें पॉजिटिव ऊर्जा देता है। रात को सोने से 3 घंटे पहले हमें भोजन कर लेना चाहिए, यह स्वास्थ्य विज्ञान कहता है और यह बात जैन सिद्धांत वर्षों से कहता आ रहा है। हमारे जबड़े, हमारे दांत और हमारी पाचन क्रिया इतनी मजबूत नहीं है कि वह नॉनवेज को पचा सके। आज तो लोग अंडे को वेज के रूप में खाते हैं और बड़े मजे से कहते हैं कि संडे हो या मंडे, रोज खाओ अंडे लेकिन हम कहते हैं कि संडे हो या मंडे, कभी ना खाओ अंडे।
हमारे पूर्वज ज्ञानियों ने बताया है कि हमें अस्त-व्यस्त समय पर भोजन नहीं करना चाहिए। भोजन करते समय हमें कोई तनाव लेना नहीं चाहिए। हम बिना किसी तनाव के भोजन करेंगे तो वह भोजन हमारे लिए अमृततुल्य होगा जबकि तनाव में किया गया भोजन विषतुल्य होता है। हमें भोजन भी बहुत चबा चबा कर करना चाहिए। आज तो लोगों के पास समय रहता नहीं है, बस जल्दी-जल्दी खाया और ऑफिस के लिए निकल गए। खाना बनाने वाले का भी दिमाग शांत होना चाहिए। उलझन भरे दिमाग से कभी किसी को खाना नहीं बनाना चाहिए।



