आज सारे विवाद की जड़ रुपए-पैसे और संपत्ति की, इन्हें छोड़ दो आपका घर स्वर्ग बन जाएगा: साध्वी शुभंकरा श्रीजी

रायपुर। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में शुक्रवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने घर को स्वर्ग कैसे बनाएं विषय पर कहा कि जब घर संयमित और संतुलित चलता है तो वह घर स्वर्ग बन जाता है। घर में बहू सास के हर दिन पैर छुए और घर का पूरा चूल्हा चौका संभाले तो ऐसा घर भी स्वर्ग से कम नहीं होता। पहले के दिनों में तो ऐसा होता ही था की बहू हफ्ते में 6 दिन चूल्हा चौका का काम करें और इतवार के दिन जब बच्चे घर पर हो तो उनकी दादी उन्हें चूल्हा चौका करना सिखाए। ताकि बच्चे पढ़ने के लिए बाहर जाए शादी होकर अपना ससुराल जाए तो उन्हें चूल्हे चौके का काम आना चाहिए। आज महिला चाहे तो घर को स्वर्ग बना सकती है और चाहे तो पल भर में सब बिगाड़ कर उसे नर्क भी कर सकती है।
साध्वीजी कहती है कि आज के दिनों में तो घरों में भाई-भाई, भाई-बहन, चाचा भतीजा के बीच में छोटी मोटी बात हो जाती है। बात इतनी बढ़ जाती है कि कोर्ट में अपने ही सगे संबंधी, खून के रिश्ते कचहरी में सामने खड़े हो जाते हैं। सबकी एक ही वजह है – संपत्ति। आज सारे विवाद रुपए-पैसे और जमीन-जायदाद को लेकर ही हो रहे हैं। लड़ भी वह रहे हैं जिन्होंने कभी रुपए-पैसे और संपत्ति को कम आया ही नहीं। बंटवारा तो एक व्यवस्था है जो आपके पूर्वजों द्वारा कमाई हुई संपत्ति को आप तक पहुंचाती है। यह वह फल है, जिसे पाने आपने कभी पुण्य किया ही नहीं। बंटवारे में जो संपत्ति आपको मिल रही है उसे चुपचाप प्रसाद समझ कर रख लेना चाहिए। वैसे भी आपको सब चीज छोड़कर एक दिन इस दुनिया से जाना ही है, आपकी आंखें बंद होगी और सब कुछ खत्म हो जाएगा फिर भी आप सब पैसे-रुपए, जमीन-जायदाद समेटने में लगे हैं। आज आप जितना ज्यादा पैसा-रूपया यहां छोड़कर जाओगे, उतना ही बड़ा विवाद आपके जाने के बाद आपकी आने वाली पीढ़ी के बीच होगा। आज घर के बुजुर्ग, माता पिता, बेटे बहु सब अपने कर्तव्यों का पालन करें और जिम्मेदारियों को निभाएं तो आपका घर स्वर्ग बन जाएगा। आप लोग आनंद के साथ जीवन बिताएं और मनुष्य जीवन को सफल एवं सार्थक बना कर खुशहाली से जीवन यापन करें।
जीवन को जीवन कैसे बनाएं
जीवन को जीवन कैसे बनाएं विषय पर साध्वीजी ने कहा कि जब सीजन नहीं होता है, आपकी दुकान नहीं चलती, कमाई नहीं होती, स्टॉक को मेंटेन करने का खर्च बढ़ता जाता है और किराए पटाने की चिंता आपको घेर लेती है। यह सारी समस्याएं एक साथ आपको घेरती है तो आपका मन विचलित हो उठता है और आप डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। जबकि बाहर से सब चीज आपको अच्छी दिखती है, लोगों को भी लगता है कि दुकान तो बढ़िया चल रही है। दुकान चलाने की होड़ में हम यह नहीं सोचते कि हमारे अंतर्मन का व्यापार कैसा चल रहा है, हमारा आंतरिक घाटा कितना हो रहा है, गुणों की आय नहीं हो रही है, गुणों का ह्रास होता जा रहा है। आत्मीयता से आप दिवालिया हो रहे हैं और आपके कसायों में वृद्धि होती जा रही हैं। इन परिस्थितियों में आपको करना क्या है, केवल आपको चिंतन की दिशा बदलनी है और अगर आप ऐसा करने में कामयाब हो जाते हो तो आपका बेड़ापार हो जाएगा।



