समस्याओं से मुंह मोड़ लोगे तो उलझ जाओगे, प्रैक्टिकल होकर सामना करोगे तो जीवन सुलझ जाएगा : साध्वी शुभंकरा श्रीजी

रायपुर। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में बुधवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने घर को स्वर्ग कैसे बनाएं विषय पर कहा कि हमें जीवन में कहीं भी रुकना नहीं है, कहीं झुकना नहीं है, बस आगे चलते जाना है, बढ़ते जाना है। जीवन जीने के लिए आपको बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है लेकिन यह आप पर निर्भर करता है कि आप उन कठिनाइयों को पार करते हो कि उनसे बचकर अपना जीवन और उलझा लेते हो। आपको समस्याओं से डरना नहीं है, परेशानियों से मुंह नहीं मोड़ना है। जो व्यक्ति अपनी परिस्थितियों से निराश हुआ, वह जीवन की परीक्षा में कभी पास नहीं हो सकता है। हमें अपनी समस्याओं से प्रैक्टिकल होकर जूझना है। आज हम जरूर अपनी परिस्थितियों का सामना करने में फेल हो सकते हैं लेकिन अगर आप उसका सामना करते जाओ, प्रैक्टिकल करते जाओ तो आप पासिंग मार्क्स तक तो पहुंच ही जाएंगे। इसमें और मेहनत करेंगे तो आप फर्स्ट डिवीजन तक पहुंच जाएंगे और फिर जीवन की परीक्षा में आप टॉप कर सकते हैं। आप अपनी परेशानियों पर पूरा नियंत्रण पा सकते हैं। हमें परमात्मा पद को प्राप्त करना है और हम भी परमात्ममय हो जाएंगे ऐसा हमें विचार करना है और उसी दिशा में हमें कर्म करते जाना है।
साध्वीजी ने कहा कि हम कर्मचक्र के बारे में बात कर रहे थे। इस सर्कल के अंदर हर समय हम अपना कर्म बांध रहे हैं, उसे भोग रहे हैं और उसका फल भी पा रहे हैं। अनंत भव से दुखी एक आत्मा ने किसी संत से पूछा कि मैं अनंत जन्मों से दुखी हूं, मुझे खुशी कहां मिलेगी। संत ने जवाब देते हुए कहा कि जहां-जहां कोने है वहां आपको सुख मिलेगा जैसे कि अष्टकोण, षठकोण आदि।
उन्होंने आगे कहा कि वह आत्मा संतुष्ट हुई कि कोने में उसे सुख मिलेगा और वह निकल पड़ी सुख की तलाश में। उसने पाया कि पृथ्वी को गोल है, यहां कोने कैसे मिलेंगे। यही सोचकर हम भी चलते ही जा रहे हैं और जो सामने आ रहा है सुख-दुख समझकर उसे भोग भी रहे हैं। दूसरी टीप देते हुए संत ने कहा कि चिंता मत करो आपको अनंत काल तक भटकना नहीं पड़ेगा। हम अनंत भव से इस सर्कल में घूम ही रहे हैं पर इस सरकार के केंद्र बिंदु पर हम अपने कर्मों का क्षय कर सकते हैं।
साध्वीजी ने कहा कि एक दृष्टिहीन व्यक्ति जो देख नहीं सकता, जिसके पास कोई सहारा नहीं है, कोई लकड़ी नहीं है, वह रास्ते में आने वाले गड्ढे में गिर सकता हैं। एक ऐसा व्यक्ति जिसको सब दिखाई देता है, वह कभी ऐसे गड्ढे में नहीं गिर सकता है। वह व्यक्ति छलांग लगाकर, गड्ढे को पाटकर या उसके साइड से बाईपास लेकर निकल सकता हैं। आजकल तो जब सड़क पर काम चलता रहता है तो वहां एक बोर्ड लगा दिया जाता है जिसमें साफ लिखा होता है कि आगे गढ्ढा है, दाई ओर चले या बाईं ओर से चले, संभाल कर चलें। इस एक साइन बोर्ड के संदेश को पढ़कर आप संभल जाते हैं और सुगमता से रास्ता पार कर लेते हैं। अब विचार कीजिए कि जीवन जीने के लिए गुरु भगवंत आपको कितने साइन बोर्ड दिखाते हैं फिर भी आप संभाल कर नहीं चलते हो।



