कोई दाल खाकर खुश है तो कोई माल पाकर खुश है, असल में खुशहाल वह है जो वर्तमान में खुश है

रायपुर। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व की तृतीय प्रभात पर नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि आज को दाल-रोटी खाकर खुश है तो कोई माल पाकर खुश है। असल में खुशहाल वही है जो अपने वर्तमान परिस्थितियों में खुश है। आज हम पर्युषण पर्व मना रहे है, यह उस अंधेरे कमरे के समान है जहां एक मोमबत्ती जली और 5 मिनट में बुझ गई। अब इन पांच मिनट के उजाले में जिसने हीरा ढंूढ लिया, वह भाग्यशाली है। परमात्मा की भक्ति आदिकाल से चली आ रही है और यह अनंत काल तक चलती रहेगी।
उन्होंने बताया कि पर्यूषण पर्व सबसे श्रेष्ठ है। यह परमात्मा की आराधना करने, व्रत, उपवास, तप, करने का उत्तम समय हैं। पर्युषण पर्व जीव को उत्तम गुणों को अपनाने की प्रेरणा देता है। इन आठ दिनों में हमें व्रत, तप, साधना कर आत्मा की शुद्धि का प्रयास करना है और स्वयं के पापों की आलोचना करते हुए भविष्य में उनसे बचने की प्रतिज्ञा करनी हैं। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य आत्मा को शुद्ध बनाने के लिए आवश्यक उपक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना है।
साध्वीजी कहती है कि दुनिया में अच्छाइयां भी हैं और बुराइयां भी। आपको वही नज़र आएगा जैसा आपका नजरिया है। अच्छी दुनिया को देखने के लिए नजारों को नहीं, नजरिये को बदलिए। हम केवल अच्छे लोगों की तलाश मत करते रहें, वरन खुद अच्छे बन जाएं। ताकि हमसे मिलकर शायद किसी की तलाश पूरी हो जाए। उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं जब कोई अपना दूर चला जाता है तो तकलीफ होती है। परंतु असली तकलीफ तब होती है जब कोई अपना पास होकर भी दूरियां बना लेता है। याद रखें, किसी को सजा देने से पहले दो मिनट रुकिये। याद रखिये, अगर आप किसी की एक गलती माफ करेंगे, तो भगवान आपकी सौ गलतियां माफ करेगा। गलती जिंदगी का एक पेज है, पर रिश्ते जिंदगी की किताब। जरूरत पडऩे पर गलती का पेज फाड़िए, एक पेज के लिए पूरी किताब फाडऩे की भूल मत कीजिए। याद रखें, पैर में मोच और दिमाग में छोटी सोच आदमी को कभी आगे नहीं बढने देती। कदम हमेशा सम्हलकर रखिए और सोच हमेशा ऊंची।
एक मिनट में जिंदगी नहीं बदलती, पर एक मिनट में सोचकर लिया गया फैसला पूरी जिंदगी बदल देता है। केवल किस्मत के भरोसे मत बैठे रहिये। जीवन में योग्यताओं को हासिल कीजिए। किस्मत से कागज तो उड़ सकता है, पर पतंग तो काबिलियत से ही उड़ेगी। भाग्य हाथ की रेखाओं में नहीं अपितु व्यक्ति के पुरुषार्थ में छिपा है। इस दुनिया में नसीब तो उनका भी होता है जिनके हाथ नहीं होते। हार और जीत हमारी सोच पर निर्भर है। मान लिया तो हार और ठान लिया तो जीत। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढने के लिए आत्मविश्वास जगाइये। खाली बोरी कभी खड़ी नहीं रह सकती और तकिये से कभी कील ठोकी नहीं जा सकती। जो लोग अपने हाथों का उपयोग हाथ पर हाथ रखने के लिए करते हैं, वे हमेशा खाली हाथ ही बैठे रहते हैं। भाग्य की रेखाएं चमकाने के लिए लक्ष्य के साथ मेहनत कीजिए, आप पाएंगे कि आपकी किस्मत केवल चार कदम दूर थी। उन्होंने कहा कि भाग्य को हरा-भरा रखने के लिए सदा सत्कर्म का पानी डालते रहिये। आखिर हरी घास तभी तक हरी रहेगी, जब तक उसे पानी मिलता रहेगा। जीवन में केवल लाभ ही मत कीजिए कभी उसे पलट कर लोगों का भला भी कीजिए।



