छत्तीसगढ़

दिल्ली मे दस दिसंबर को गोस्वामी समाज की संयुक्त बैठक

धमतरी — वीरेंद्र अयोध्या पुरी, भिलाई, छत्तीसगढ़ अध्यक्ष, राष्ट्रीय कार्यकारिणी गोस्वामी समाज ने प्रेस कांफ्रेंस में अवगत कराया कि दिनांक 10-12-2023 को महरौली, दक्षिण दिल्ली में लगभग 42 अलग-अलग गोस्वामी समाज के संगठनो और सभाओं एवं समितियों के प्रमुखों/प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक होगी।

गोस्वामी समुदाय के महत्वपूर्ण मुद्दे जैसे सरकार और राजनीतिक दलों द्वारा अनदेखी, सत्ता, राजनीतिक दल, सरकार में प्रतिनिधित्व,देश धर्म और संस्कृति बचाने के लिए के लिए सन्यासियों (वर्तमान में गोसाईं/गोसावी/गोस्वामी ) का देश की स्वतंत्रता और आध्यात्म की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान, अखाड़ों और आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित चार ऐतिहासिक मठों, 12 ज्योतिर्लिंग, उनसे सम्बंधित एकात्म धाम ओंकारेश्वर और अन्य संस्थान की देख रेख और प्रशासन में गोस्वामी समाज को स्थान, अखाड़ों को समय के अनुरूप बदलाव वर्तमान परिपेक्ष्य के अनुरूप प्रासंगिक बनाना और सुधार, संन्यास परंपरा का सरलीकरण, आदि गुरु शंकराचार्य जी के नाम पर ट्रेन चलाना, आदि गुरु शंकराचार्य जी के साहित्य का संग्रह एवं अलग-अलग राज्यों में उनकी प्रतिमाओं की स्थापना, उनकी जयंती मनाना, धार्मिक स्थलों मठ, मंदिरों से संत, महात्माओं, महन्तों एवं पुजारियों का जबरदस्ती विस्थापन रोकना, भूमि के स्वामित्व अधिकार में सरकारों द्वारा परिवर्तन कर कब्जा करना, सरकार और शक्तिशाली लोगों द्वारा समुदाय की धार्मिक भूमि पर कब्ज़ा और गोस्वामी लोगों का विस्थापन,और अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक समस्याएँ पार चर्चा की जाएगी।

   उल्लेखनीय है कि आदि गुरु शंकराचार्य जी  छोटी उम्र में ही सन्यासी बन गये थे, उन्होंने दस नाम( गिरि,पुरी, भारती, बन, सागर,पर्वत, तीर्थ,आश्रम सरस्वती, अरण्य) साथ सन्यासियों को पुनर्गठित किया था।

जब हिन्दू धर्म पर प्रहार हो रहा था और हिन्दू बड़ी संख्या में परिवर्तित हो रहे थे, अनेक कुरीतियों के कारण हिन्दू धर्म को हानि पहुंच रही थी, तब उन्होंने केरल से कश्मीर तक पैदल यात्रा की, बहुत सारा धार्मिक साहित्य लिखा, देश के सभी हिस्सों से लोगों को एकजुट करने और संगठित करने के लिए चारों दिशाओं में चार ऐतिहासिक मठों (वर्तमान में श्री शारदा मठ (पीठ ) द्वारिका गुजरात, से ज्योतिष मठ बदरी धाम, श्री गोवर्धन पीठ पुरी , श्री श्रृंगेरी मठ रामेश्वरम के नाम से जाना जाता है…) की स्थापना की और 4 शंकराचार्यों को विराजित किया और देश धर्म और संस्कृति के प्रति पूर्ण विश्वास और प्रेम भाव से जागरूकता फैलाई जिसका ही परिणाम है कि आज हिंदू एकजुट हो रहे हैं।

देश की बड़ी जनसंख्या उनकी अनुयायी बन गयी, उनके प्रयासों से बड़ी आबादी जहां तक कई हिंदू राजा भी हिंदू धर्म में वापस आये।

आद्य शंकराचार्य स्वामी जी महाराज को जगतगुरु की उपाधि, इन्ही सब कारणों से ही प्राप्त हुई।

जगतगुरु शंकराचार्य जी के जाने के बाद उनके शिष्यों, साधु संतों द्वारा लोगों को दीक्षा दिया जाकर लोगों को धर्म के साथ जोड़े रखा,अध्यात्म के माध्यम से ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बताया और शिष्य-गुरु परंपरा को जीवित रखा।

जब विदेशी आक्रमणकारियों ने हिंदू मंदिरों और धार्मिक पवित्र पुस्तकों को लूटना, जलाकर नष्ट करना शुरू कर दिया, जबरदस्ती धर्म परिवर्तन किया तो इस दशनामी गोस्वामी समुदाय के साधु संतों ने अखाड़ों की स्थापना की तथा शास्त्र के साथ साथ शारीरिक स्वास्थ्य रखते हुए शस्त्र प्रशिक्षण दिया और खुद भी राजाओं की सेना का हिस्सा बने और युद्धों में बलिदान दिये।

बंगाल में सन्यासियों ने वंदेमातरम का नारा दिया और स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया और जनता में जोश भर दिया जो “सन्यासी विद्रोह” कर दिया।
इस समुदाय के कई लोगों और साधु संतों ने देश के लिए बलिदान दिया, लेकिन देश धर्म और संस्कृति के लिए इतने बड़े बड़े योगदान के बावजूद आजादी के बाद से ही सरकारों और राजनीतिक दलों की अनदेखी के कारण यह समुदाय कई गंभीर सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहा है।

जिसे सुलझाने हेतु ही 10 दिसंबर 2023 रविवार को महरौली दक्षिण दिल्ली में सभी प्रमुख संगठनों के प्रमुखों की उपस्थिति में बैठक आयोजित की गई है।

Author Desk

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