छत्तीसगढ़

जब तक दक्ष-आरंभ होते रहेगा तब तक भारत में परिवर्तन दिखाई देगा,शिवाजी प्रभात शाखा में धूमधाम से मकर संक्रांति का पर्व मनास्वयंसेवकों में तिलगुड़ के लड्डू बांटे गए

वक्ताओं ने हिन्दू संस्कृति के गुणों का बखान किया

धमतरी – ज्योतिष के अनुसार मकर संक्रांति को सूर्य उपासना का महापर्व कहा जाता है। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन में जाता है। खरमास की समाप्ति होती है। इस दिन सूर्यदेव अपनी तेज गति से चलना प्रारंभ करते हैं। साथ ही सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जायेगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 6 उत्सव में शामिल छटवां उत्सव मकर संक्रांति का पर्व है। सूर्य उपासना का यह पर्व संघ की सभी शाखाओं में धूमधाम से मनाया जाता है। इसी कड़ी में 14 जनवरी को शिवाजी प्रभात शाखा में मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगाें को तिलगुड़ के लड्डू का वितरण किया गया। मराठी में कहावत है तिल गुड़ घ्या नी गोड़-गोड़ बोला अर्थात तिल गुड़ खाओ और मीठा मीठा बोलो।
14 जनवरी को शिवाजी प्रभात शाखा में प्रात: 7 बजे मकर संक्रांति का पर्व मनाने शाखा लगाई गई। संपत्त होकर भगवा ध्वज लगाकर ध्वज प्रणाम करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ तीन सूर्य नमस्कार के साथ हुआ। गणवेश में पहुंचे स्वयंसेवकों ने मंत्रों के साथ सूर्य नमस्कार कर अपने दिन की शुरूआत की। तत्पश्चात अमृत वचन, एकल गीत की प्रस्तुति दी गई। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जिला सहकार्यवाह थे। अध्यक्षता समाजसेवी विश्वजीत सिंह कृदत्त ने की। मुख्य अतिथि शाखा पालक राघवेन्द्र राव रणसिंह थे।

इस अवसर पर अध्यक्षता कर रहे कृदत्त ने कहा कि मकर संक्रांति पर वातावरण में जबरदस्त बदलाव आता है। हमें भी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहिए। इस मकर संक्रांति के बाद हमारे देश में श्रीराम मंदिर का निर्माण हो रहा है। यह हमारे लिए ही नहीं पूरे विश्व को गौरवान्वित करने वाला पल है। हजारों साल पहले अयोध्या भारत की राजधानी हुआ करती थी। वर्तमान समय में कहीं से मूर्तियां बाहर आ रही हैं कहीं हिन्दू चिन्ह बाहर आ रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है। 1000 साल बाद शक्ति पुन: लौटकर भारत आई है। उन्होंने भारत की पुरानी परंपरा जैसे बाल विवाह, सती प्रथा, घूंघट प्रथा के कारण बताए। आज हम सब इन रूढ़ियों को छोड़कर आगे बढ़ गए हैं। हजारों साल के बाद भी हिन्दू अभी भी अपने 365 दिन हिन्दू त्यौहार और मान्यता को जीवित रखे हुए हैं। हमें किसी परिवर्तित लोगों को वापस लाने का प्रयास नहीं करना है। हमें अपने हिन्दू धर्म को इतना तेजवान और प्रकाशित करना है कि लोग स्वमेव हिन्दू धर्म में वापस आ जाएं।
तपश्चात मुख्य वक्ता जिला सहकार्यवाह ने मकर संक्रांति पर्व की महत्ता बताई। उन्होंने हिन्दू समाज के बरे में बताया कि हिन्दू समाज कभी गुलाम नहीं रहा। उन्होंने हमेशा विदेशी आक्रांताओं से संघर्ष किया। एक उदाहरण देकर उन्होंने एक डाकू व साधु सहित कल्पवृक्ष की कहानी बताई। उन्होंने आगे कहा कि हिन्दू संस्कृति सभी को दिशा देने की संस्कृति है। इकबाल की कविता सुनाई जिसका अर्थ है यूनान, मिश्र और रोम की संस्कृति मिट गई पर भारत की संस्कृति आज तक बनी हुई है। हिन्दू हमेशा संघर्षशील रहा और भारत हजारों साल से हिन्दू राष्ट्र बना हुआ है। पूज्य सरसंघचालक डॉ.हेडगेवार ने जो संघ की स्थापना की है , आज जो परिणाम आ रहा है, वह इसी के कारण है। शाखा में जो दक्ष-आरंभ हो रहा है यही धड़कन है। यह जब तक चलेगा नया परिवर्तन होते रहेगा। अंत में प्रार्थना पश्चात सभी को गुड़ तिल के लड्डू बांटे गए। इस अवसर पर नगर कार्यवाह गौरव मगर, जिला प्रचार प्रमुख निलेश राजा, वरिष्ठ स्वयंसेवक विनोदराव रणसिंह, रामजी साहू, पवन कौशिक, अजय साहू, शाखा कार्यवाह राजू सोनकर, नितेश कुंभकार, शाखा के मुख्य शिक्षक राजकुमार पटेल, योगेश साहू, धनेश्वर यादव, राजू निर्मलकर, बाल स्वयंसेवक अयांश सिंह, संघ के नगर प्रचार प्रमुख उमेश सिंह बशिष्ट व अन्य उपस्थित थे।

अपने अंदर के बल को पहचाने
मुख्य वक्ता ने एक कहानी बताई। एक बार गुरूनानक देव जी भ्रमण कर रहे थे। उन्हें किसी गांव जाना था। रास्ते में जंगल था जहां पर एक विषैला नाग रहता था। जो आने जाने वालों को दौड़ाकर काट भी देता था। लोग उस रास्ते पर जाने से डरते थे। ग्रामीणों ने श्री गुरूनानक देव जी को उस रास्ते पर जाने से मना किया। श्री गुरूनानक देव नहीं माने और उसी रास्ते पर गए। रास्ते में विषैला नाग मिला। गुरूदेव जी की समझाईश पर नाग ने लोगों को परेशान करना बंद कर दिया। कुछ दिन बाद नानकदेव जी वापस आए तो नागदेव लहुलूहान पड़ा मिला। पूछने पर नागदेव ने बताया कि आपके कहे अनुसार वह शांत हो गया तो लोगों ने उसे लहुलूहान कर दिया। तब नानकदेव जी ने कहा कि अरे भाई आपको किसी को काटने के लिए मना किया है, फुंफकारने से नहीं। अपनी तथा समाज की रक्षा के लिए लोगों को हमेशा खड़े होकर विरोध करना चाहिए।

Author Desk

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