नक्सलियों को मिली डेडलाइन के 52 दिन शेष, आज छत्तीसगढ़ आएंगे शाह
हाई लेवल मीटिंग लेंगे केंद्रीय गृहमंत्री, बस्तर पंडुम के समापन में होंगे शामिल

शाह का तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा आज से
रायपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तीन दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। इस दौरे में शाह नक्सलवाद को लेकर हाई लेवल मीटिंग और विभिन्न कार्यक्रमों के साथ ही बस्तर पंडुम के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे। केंद्रीय गृहमंत्री की ओर से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में तय की गई नक्सलियों की डेडलाइन 31 मार्च 2026 की समय सीमा अब बेहद करीब है। बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री शाह का दो महीने में ये दूसरा छत्तीसगढ़ प्रवास है। इससे पूर्व वे 28 से 30 नवंबर तक 2025 तक छत्तीसगढ़ दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने नवा रायपुर स्थित आईआईएम परिसर में आयोजित 60वें डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन में शामिल हुए थे।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तय कार्यक्रम के अनुसार 7 फरवरी को शाम 4:40 बजे रायपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। एयरपोर्ट पर स्वागत के बाद वे सीधे निजी होटल के लिए रवाना होंगे। वरिष्ठ अधिकारियों से अनौपचारिक चर्चा के बाद यहीं रात्रि विश्राम करेंगे। अमित शाह अगले दिन 8 फरवरी की सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक नक्सलवाद को लेकर हाई लेवल मीटिंग लेंगे। इस बैठक में छत्तीसगढ़ सहित अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों की सुरक्षा स्थिति, चल रहे ऑपरेशनों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके बाद शाम 5 से 6:10 बजे तक अमित शाह शिफ्टिंग द लेंस थीम पर आयोजित राष्ट्रीय कॉनक्लेव में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम नीति, सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहेगा. कार्यक्रम के बाद वे फिर निजी होटल लौटेंगे और वहीं रात्रि विश्राम करेंगे।
बस्तर पंडुम में होंगे शामिल
अमित शाह 9 फरवरी को सुबह 11 बजे विशेष विमान से रायपुर से दंतेश्वरी एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे। वहां से वे सडक़ मार्ग से बस्तर पंडूम के कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे। दोपहर 12:05 से शाम 4 बजे तक वे बस्तर पंडूम के समापन कार्यक्रम में शामिल रहेंगे। इस दौरान आदिवासी संस्कृति, विकास और शांति का संदेश दिया जाएगा। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद शाम 4:20 बजे वे जगदलपुर से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
बता दें कि साल 2025 में नक्सल मुठभेड़ों में 317 माओवादी मारे गए हैं। इनमें नक्सलियों का महासचिव खूंखार नक्सली बसव राजू और हिड़मा जैसे 11 केंद्रीय समिति के शीर्ष सदस्य शामिल थे। अब तक 1973 नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं। यह सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति की सफलता को दर्शाती है।



