फूड पार्क के लिए जमीन अधिग्रहण का ग्रामीणों ने किया विरोध, भालूझूलन में उग्र प्रदर्शन

ग्रामीणों की दो टूक – उद्योग नहीं, गांव की जमीन और चारागाह सुरक्षित चाहिए
धमतरी (प्रखर)कुरूद ब्लॉक के समीपस्थ ग्राम पंचायत कन्हारपुरी के आश्रित गांव भालूझूलन में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र (फूड पार्क) को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। शासन द्वारा चिन्हांकित लगभग 11 हेक्टेयर शासकीय घास जमीन के अधिग्रहण के विरोध में ग्रामीणों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि उद्योग के नाम पर गांव की चारागाह, आबादी, मुक्तिधाम और तालाब जैसी निस्तारी भूमि खत्म की जा रही है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि 2 फरवरी को नेशनल हाईवे के समीप ग्राम डांडेसरा क्षेत्र में प्रस्तावित औद्योगिक पार्क का भूमिपूजन क्षेत्रीय विधायक अजय चंद्राकर द्वारा किया गया था। इसके बाद उद्योग विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने जमीन का सीमांकन कार्य शुरू कर दिया। जैसे ही यह जानकारी ग्रामीणों तक पहुंची, वे आक्रोशित हो उठे और बिना पूर्व सूचना व सहमति के भूमि अधिग्रहण का आरोप लगाते हुए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।
गुरुवार को भालूझूलन और डांडेसरा के बीच प्रस्तावित स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और घंटों तक धरने पर बैठे रहे। ग्रामीणों रामाधार दीवान, बहुरी दीवान, उमा दीवान, शीतल साहू, संतोष यादव, धर्मेंद्र कुमार, सुरेश तिवारी, दुलेश पटेल, नीरा कंवर, उषा शर्मा, महेश्वरी साहू, केकती पटेल, ललित कुमार, शेषनारायण तिवारी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव की घास जमीन और चारागाह पशुओं के लिए अत्यंत आवश्यक है। बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए आबादी विस्तार के लिए भी जमीन की जरूरत है। यदि यह भूमि उद्योग के लिए दे दी गई तो भविष्य में गांववासियों के सामने निस्तार की गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीमांकन के दौरान खंभे गाड़ने का कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है, जिसे समय रहते नहीं रोका गया तो वे उसे हटाने को मजबूर होंगे।
धरना स्थल पर पहुंचे जिला पंचायत सदस्य नीलम चंद्राकर ने ग्रामीणों की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि क्षेत्र की जमीन को औद्योगिक पार्क के नाम पर अधिग्रहित करना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने की कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले से स्थापित परियोजनाओं में भी स्थानीय युवाओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिले हैं।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर गांव की मूलभूत जरूरतों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। यदि क्षेत्र का विकास करना है तो स्कूल, कॉलेज और अस्पताल जैसे जनहित के कार्य किए जाएं, न कि चारागाह और निस्तारी भूमि का अधिग्रहण।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार कुरूद सूरज बंछोर भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा करते हुए आश्वासन दिया कि उनकी आपत्तियों और सुझावों को उद्योग विभाग तक पहुंचाया जाएगा तथा सभी पहलुओं पर विचार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल भालूझूलन में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच होने वाली वार्ता पर सभी की नजरें टिकी हैं।



