कांकेर के गांव में धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर रोक वाले पोस्टर लगे रहेंगे, सुप्रीम कोर्ट ने मिशनरियों की याचिका खारिज कर दी

रायपुर। कांकेर जिले में ग्राम सभाओं द्वारा लगाए गए ईसाई मिशनरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध’ वाले बोर्डों को सुप्रीम कोर्ट ने भी मंजूरी दे दी है। 16 फरवरी 2026 को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने ईसाई मिशनरियों की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा, पेसा कानून (पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्र अधिनियम 1996) के तहत ग्राम सभाएं अपने सामाजिक-सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए सक्षम हैं। इससे पेसा के अधिकारों को और मजबूती मिली है।
मामला कांकेर जिले के आठ गांवों (कुडाल, परवी, जुनवानी, घोटा, घोटिया, हवेचुर, मुसुरपुट्टा और सुलांगी) से जुड़ा है। इन ग्राम पंचायतों ने गांव की सीमा पर बोर्ड लगाए थे, जिनमें लिखा था कि गांव पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, पेसा लागू है और ग्राम सभा अपनी परंपरा, संस्कृति, जनजातीय पहचान की रक्षा कर सकती है। बोर्डों में ईसाई पास्टर्स और अन्य गांवों से आए धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी। ताकि प्रलोभन या धोखे से जबरन धर्मांतरण न हो सके।
हाईकोर्ट ने असंवैधानिक नहीं माना
याचिकाकर्ताओं (दिग्बल टांडी समेत) ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 28 अक्टूबर 2025 को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति विभू दत्त गुरु की खंडपीठ ने याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने बोर्डों को असंवैधानिक नहीं माना और कहा कि ये एहतियाती उपाय हैं, जो आदिवासी संस्कृति और विरासत की रक्षा के लिए लगाए गए। याचिकाकर्ता सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्वेस के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे पेसा नियमों के तहत वैधानिक प्राधिकारी (ग्राम सभा/कलेक्टर) के पास जाएं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य की ओर से कहा कि याचिका में नई बातें जोड़ी जा रही हैं। छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, पेसा और पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अपनी संस्कृति बचाने का पूरा अधिकार है। हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट की मुहर से ग्राम सभाओं की जीत हुई है।
मैं लाइट माइक टेंट की व्यवस्था दूंगा,,, चोरी छुपे प्रचार क्यों करते हैं : अजय चंद्राकर
कांकेर के ग्रामीण इलाकों में धर्मांतरण के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अजय चंद्राकर ने कहा मैं कह रहा हूं मेरे निर्वाचन क्षेत्र पर मैं लाइट माइक टेंट की व्यवस्था दूंगा, वहां जाकर पास्टर सार्वजनिक रूप से व्याख्यान दें और अपने कार्यक्रम के बारे में बताएं। चोरी छुपे कम जानकारी वाले लोग या अशिक्षित वर्ग के बीच जाकर धर्म का प्रचार क्यों करते हैं।
प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी लंबे समय से गठित नहीं हो पाने पर अजय चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस में कार्यकारिणी बनाने के लिए आरक्षण की व्यवस्था कर देनी चाहिए। घोषित तौर पर आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए। 33 प्रतिशत टीएस सिंहदेव, 33 प्रतिशत भूपेश बघेल, 33 प्रतिशत दीपक बैज और 1 प्रतिशत चरण दास महंत तो 100 प्रतिशत हो जाएगा। इस फार्मूले से तुरंत कांग्रेस की कार्यकारिणी गठित हो जाएगी।
अजय चंद्राकर ने छोटे-छोटे मुद्दों पर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर कहा कि कांग्रेस के लोग जीने की कोशिश कर रहे हैं। प्रासंगिक बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। इससे ज्यादा उनका उद्देश्य नहीं है। कांग्रेस नाम का कोई पदार्थ है। किसी परिवार की कोई संस्था है। उसकी उसे चर्चा में रखना है, हम जिंदा है, यह बताना है, इसलिए कांग्रेस यह कर रही। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के दौरे पर कांग्रेस द्वारा सवाल उठाए जाने पर अजय चंद्राकर ने कहा कि क्या कांग्रेस से पूछ कर अपना काम करेंगे कांग्रेस अपने काम पर ध्यान दें।
कांग्रेस अजय चंद्राकर को पार्टी में शामिल होने का ऑफर देती है इसे लेकर उन्होंने कहा, कांग्रेस को किसी की जरूरत है तो पहले यह स्वीकार करें कि वह अक्षम है। कांग्रेसियों पर बदहवासी हावी है, बदहवास आदमी के शब्दों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।



