सवाल पूछो तो सजा मिलेगी? धमतरी निगम में तानाशाही का आरोप
राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से स्वास्थ्य विभाग सभापति नीलेश लुनिया को हटाने का कांग्रेस पार्षदों ने लगाया आरोप, भवन अनुज्ञा के मामलों की जांच और दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग

सवाल पूछो तो सजा मिलेगी? धमतरी निगम में तानाशाही का आरोप
राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से स्वास्थ्य विभाग सभापति नीलेश लुनिया को हटाने का कांग्रेस पार्षदों ने लगाया आरोप, भवन अनुज्ञा के मामलों की जांच और दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
धमतरी। नगर निगम धमतरी में विभागीय जिम्मेदारियों में हुए फेरबदल को लेकर सियासत गरमा गई है। स्वास्थ्य विभाग के सभापति नीलेश लुनिया को विभाग की जिम्मेदारी से हटाए जाने के फैसले पर कांग्रेस पार्षदों ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे “सवाल पूछने की सजा” और “तानाशाही रवैया” करार दिया है। कांग्रेस पार्षदों का आरोप है कि भवन अनुज्ञा विभाग से जुड़े मामलों में अनियमितताओं और कथित अवैध वसूली को लेकर जब सवाल उठाए गए और पारदर्शिता की मांग की गई, तो जवाब देने के बजाय स्वास्थ्य विभाग के सभापति को ही हटा दिया गया।
नेता प्रतिपक्ष दीपक सोनकर, उप नेता प्रतिपक्ष विशु देवांगन, पार्षद योगेश लाल और सूरज गहरवाल ने संयुक्त रूप से कहा कि नगर निगम में जनप्रतिनिधियों की भूमिका जनता की आवाज उठाने की है। यदि किसी विभाग में अनियमितता को लेकर सवाल उठते हैं तो उसका जवाब देना और तथ्यों को सामने रखना निगम प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन यहां सवालों का समाधान करने के बजाय सवाल उठाने वाले जनप्रतिनिधि की विभागीय जिम्मेदारी ही बदल दी गई।
कांग्रेस पार्षदों ने कहा कि भवन अनुज्ञा से जुड़े मामलों में सभापति कौशिल्या देवांगन द्वारा सवाल उठाए गए थे। इन सवालों का समर्थन स्वास्थ्य विभाग सभापति नीलेश लुनिया ने भी किया था। कांग्रेस का आरोप है कि दोनों जनप्रतिनिधियों ने कथित अवैध वसूली और अनियमितताओं को लेकर पारदर्शिता की मांग की थी। इसके बाद नीलेश लुनिया को स्वास्थ्य विभाग से हटाने का फैसला राजनीतिक प्रतिशोध की भावना को दर्शाता है।
“सवाल का जवाब देने के बजाय पद से हटाया”
कांग्रेस पार्षदों ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना जनप्रतिनिधि का अधिकार है। नगर निगम की बैठकों में पार्षद जनता से जुड़े मुद्दे उठाते हैं और संबंधित विभागों से जवाब मांगते हैं। यदि किसी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं तो उनकी जांच होनी चाहिए, न कि सवाल उठाने वाले जनप्रतिनिधि को ही जिम्मेदारी से हटा दिया जाए।
उन्होंने कहा, “नगर निगम में यदि सवाल पूछने पर पद छिनने लगे तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। क्या अब पार्षदों को अपने ही निगम में अनियमितताओं पर सवाल उठाने से पहले सोचना पड़ेगा?”
स्वास्थ्य विभाग की नई जिम्मेदारी पर भी सवाल
कांग्रेस पार्षदों ने स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी में किए गए बदलाव को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी राजस्व एवं बाजार सलाहकार समिति के प्रभारी सदस्य को दी गई है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक संबंधित सदस्य पूर्व में निजी कारणों का हवाला देते हुए अपने वर्तमान विभाग की जिम्मेदारी संभालने में असमर्थता जताते रहे हैं।
कांग्रेस पार्षदों ने सवाल किया कि यदि कोई व्यक्ति अपने वर्तमान विभाग की जिम्मेदारी संभालने में कठिनाई की बात कह रहा था, तो उसे स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी देने का निर्णय किस आधार पर लिया गया?
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग केवल एक सामान्य विभाग नहीं है। शहर में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम, सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, नालियों की स्थिति, दूषित पानी की शिकायतें और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषय इसी विभाग से जुड़े हैं। ऐसे विभाग की जिम्मेदारी को लेकर निगम को स्पष्ट नीति और जवाबदेही तय करनी चाहिए।
महिला पार्षदों ने भी नई नियुक्ति पर उठाए सवाल
महिला पार्षद पूर्णिमा गजानंद रजक, सुमन सोमेश मेश्राम, रामेश्वरी कोसरे और उमा भागी ध्रुव ने भी नई नियुक्ति और विभागीय फेरबदल को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि विभागों का वितरण केवल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नहीं, बल्कि संबंधित विभाग को प्रभावी ढंग से संचालित करने की क्षमता और जनहित को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नगर निगम में विभागीय जिम्मेदारियां बदलने का अधिकार महापौर को हो सकता है, लेकिन किसी फैसले के पीछे यदि राजनीतिक प्रतिशोध की चर्चा हो रही है तो उस पर स्पष्टीकरण देना भी जरूरी है।
कांग्रेस ने पूछे तीन बड़े सवाल
पहला सवाल: भवन अनुज्ञा विभाग में अनियमितताओं और कथित अवैध वसूली को लेकर सवाल उठाए गए थे, तो उन सवालों की जांच क्यों नहीं कराई गई?
दूसरा सवाल: क्या नगर निगम में जनप्रतिनिधि द्वारा सवाल पूछना गुनाह है? यदि नहीं, तो सवाल उठाने वाले स्वास्थ्य विभाग सभापति को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?
तीसरा सवाल: जो व्यक्ति अपने वर्तमान विभाग को निजी कारणों से संभालने में असमर्थता जताता रहा है, उसे स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी देने के पीछे क्या कारण है?
“जांच हो, दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं”
कांग्रेस पार्षदों ने मांग की है कि भवन अनुज्ञा विभाग से जुड़े सभी विवादित मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने संबंधित दस्तावेज और प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि यदि सब कुछ नियमों के मुताबिक हुआ है तो दस्तावेज सामने लाने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नगर निगम जनता के पैसों और जनता की सुविधाओं से जुड़ी संस्था है। यहां होने वाले प्रत्येक निर्णय में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। विभागीय फेरबदल को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब भी सार्वजनिक रूप से दिया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम में राजनीतिक खींचतान अब इतनी बढ़ गई है कि इसका असर विभागीय कामकाज पर भी दिखाई देने लगा है। कांग्रेस पार्षदों ने कहा कि जनता के मुद्दों को उठाने वाले पार्षदों की आवाज दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं तो तथ्यों के साथ उनका खंडन किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह भवन अनुज्ञा से जुड़े मामलों और स्वास्थ्य विभाग की नई जिम्मेदारी को लेकर उठ रहे सवालों को जनता के बीच ले जाएगी। साथ ही निगम प्रशासन से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और जनहित में स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।



