एसआईआर और वोट चोरी पर सियासी अराजकता, कल राष्ट्रपति से मिले विपक्षी नेता, आज सीजेपी के अभिजीत दिपके हिरासत में
नई दिल्ली। एसआईआर और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर सियासी घमासान तेज हो गया है। शुक्रवार को राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और ममता बनर्जी समेत विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। वहीं, शनिवार को दिल्ली पहुंचे सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके दो सहयोगियों को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया गया।
वोट चोरी और एसआईआर पर विपक्ष का राष्ट्रपति मुर्मू से मिला प्रतिनिधिमंडल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मामले में हस्तक्षेप की मांग की। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में वोट चोरी हो रही है और इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति ने उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों को खारिज नहीं किया। हालांकि, उनके इस बयान से राष्ट्रपति की ओर से आरोपों की पुष्टि होना नहीं माना जा सकता। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 12 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
विजय चौक पर रोका गया विपक्षी सांसदों का मार्च
राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले इंडिया गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस ने सांसदों को विजय चौक पर रोक दिया। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित वोट चोरी के मुद्दे को लेकर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकाला था।
इससे पहले विपक्षी सांसद संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में एकत्र हुए, जहां उन्होंने कथित वोट चोरी के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाने और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग पर रणनीति पर चर्चा की। राष्ट्रपति भवन को प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने वाले नेताओं के नाम पहले ही भेज दिए गए थे।
प्रतिनिधिमंडल में कई विपक्षी दलों के नेता शामिल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा, वीसीके प्रमुख थोल. थिरुमावलवन, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर, माकपा महासचिव एमए बेबी और भाकपा नेता डी. राजा शामिल थे। विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति के सामने मतदाता सूची की प्रक्रिया, चुनावी पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका से जुड़े सवाल उठाए।
खरगे बोले- राष्ट्रपति ने हमारी बातें ध्यान से सुनीं
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने उन्हें अपने आंदोलन और वोट चोरी से संबंधित चिंताओं से अवगत कराया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी रखी।
खरगे के अनुसार, राष्ट्रपति ने कथित वोट चोरी से जुड़े सबूत मांगे हैं। विपक्षी दल फिलहाल इन सबूतों को एकत्र कर रहे हैं और उन्हें राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। खरगे ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने उनकी बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और मामले की जांच करने, संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श करने तथा उचित कदम उठाने पर विचार करने की बात कही।
एसआईआर और चुनावी पारदर्शिता पर बढ़ा राजनीतिक विवाद
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों तथा सत्तारूढ़ पक्ष के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी दल इन प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के बाद विपक्षी नेताओं ने संकेत दिया कि वे इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहेंगे। वहीं, वोट चोरी से जुड़े आरोपों और उनके समर्थन में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों पर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
एसआईआर और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी विरोध के बीच राहुल गांधी का बयान, कहा- फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘ज्ञानेश कुमार जाएंगे। यह सरकार जाएगी। फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत।’ उनका यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच आया है।
राहुल गांधी के इस बयान को चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष के विरोध से जोडक़र देखा जा रहा है। विपक्षी दल एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली में 1500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का दावा
नई दिल्ली। मुंबई से दिल्ली पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर विमान के उतरते ही पुलिस टीम अंदर पहुंची और अभिजीत दिपके के साथ उनके सहयोगियों सौरभ दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि तीनों को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होना था। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बनने पर उन्हें विमान के भीतर से ही हिरासत में ले लिया गया। पुलिस का कहना है कि सीजेपी को प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है, इसलिए पार्टी जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकती।
‘मैं गिरफ्तार होने आया हूं, मुझे गिरफ्तार कीजिए’
दिल्ली एयरपोर्ट पर पुलिस की कार्रवाई के दौरान अभिजीत दिपके ने गिरफ्तारी की चुनौती देते हुए कहा कि वह दिल्ली गिरफ्तार होने के लिए आए हैं और पुलिस उन्हें गिरफ्तार करे। इस पर पुलिसकर्मियों ने कहा कि यह गिरफ्तारी नहीं है और उनसे सहयोग करने को कहा। दिपके इससे पहले भी कह चुके हैं कि वह हिरासत या गिरफ्तारी से नहीं डरते और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे। सीजेपी की ओर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी की गई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण पुलिस ने कार्रवाई की।
दिल्ली में कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का दावा
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना चाहती थी।
प्रदर्शन से पहले दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खबर लिखे जाने तक 1500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली की सीमाओं पर निगरानी बढ़ाने और सुरक्षा बलों की तैनाती किए जाने की जानकारी है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अर्धसैनिक बलों की 221 कंपनियां तैनात की गई हैं। इसके अलावा, दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास को बंद किए जाने का दावा किया गया है। जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सडक़ों पर अवरोधक लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है। रेल सेवाओं पर भी असर पडऩे और कई मेल एवं एक्सप्रेस ट्रेनों के रद्द किए जाने का दावा किया गया है।
एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर बढ़ा विवाद
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों तथा सीजेपी की ओर से विरोध जताया जा रहा है। सीजेपी का प्रस्तावित प्रदर्शन इसी मुद्दे पर केंद्रित था। दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और हिरासत की कार्रवाई चर्चा में है। फिलहाल, अभिजीत दिपके और उनके सहयोगियों को हिरासत में लिए जाने के मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार है।



