जमीन पर बैठने, सोने और पैदल चलने से बड़ा सुख जीवन में कोई नहीं है, करके देखिए : साध्वी शुभंकरा श्रीजी

रायपुर। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि आज हम सब अत्याधुनिक दौर में है। हमारे पास जीवन में सभी काम के लिए कोई ना कोई मशीन या सामान है, जो हमारे सभी कामों को बहुत ही आसान बना देता है। आप एक बटन दबाते हो और टीवी चालू हो जाता है आप एक बटन दबाते हो ऐसी चालू हो जाता है आप एक बटन को जरा सा घुमाते हो आपका वाशिंग मशीन चालू हो जाता है घर में बर्तन मांजने के लिए भी आजकल लोग मशीन लगाने लगे हैं। आपके पास आज इतनी सारी सुख सुविधाएं हैं जितनी कि आज से 400 साल पहले तक किसी राजा के पास भी नहीं थी।
आप अपने पूर्वजों को ही देख लीजिए उनके पास कोई गद्देदार बिस्तर नहीं था आलीशान सोफा नहीं था और गाड़ियां भी नहीं थी। फिर भी वह आराम से जमीन पर सोते, जमीन पर बैठकर ही खाना खाते थे और पैदल ही नगर मैं घूम कर अपना सारा काम कर लेते थे। यह भी एक बहुत बड़ा कारण था, किसी को कोई टेंशन नहीं थी। आज तो मोबाइल सबके पास है, जो क्षण-क्षण में आपको एक नया टेंशन देता है, आप अपनी दिनचर्या में मोबाइल से दूर रहकर गद्देदार बिस्तर और सोफे से दूर रहकर, जमीन पर सो कर, जमीन पर बैठकर और पैदल घूम कर देखिए आपको अलग ही अनुभूति होगी, अलग ही सुख आपको मिलेगा।
शादी-पार्टी, भंडारे में खाली टिफिन लेकर न जाएं
आजकल तो लोग शादी-पार्टी और भंडारे में भी टिफिन का डिब्बा लेकर पहुंचते हैं। सुख हो या दुख हो, वह यह नहीं देखते और एक डिब्बा लेकर बस पहुंच जाते हैं। क्या कभी आप किसी के घर डिब्बे में भरकर अपने घर में बने व्यंजन लेकर गए हैं, कभी नहीं। ऐसा सिर्फ त्योहारों में देखने को मिलता है और वह भी इसीलिए क्योंकि आप अपने हाथ का स्वाद दूसरों को चखाना चाहते हैं और अपनी तारीफ सुनना चाहते हैं। आप शादी पार्टी और भंडारे में डिब्बा लेकर जा भी रहे हैं तो इतना बड़ा लेकर जाइए कि आप वहां से भोजन लाकर सबको खिला सकें। हो सके तो ऐसे मौकों पर आप अपने घर से कुछ व्यंजन बनाकर, डिब्बे में भरकर उसे ले जाएं और सबको खिलाए, फिर देखना आपको कैसी अनुभूति होती है। आपने केवल लेना सीखा है, देना नहीं। देने का सुख अलग ही है, कभी किसी को कुछ देकर देखिए।