हत्या, बलात्कार, ठगी और एक्सीडेंट की धाराओं में परिवर्तन
जनजागरूकता लाने एसडीओपी रागनी मिश्रा ने दी नए कानून की जानकारी


कुरुद (प्रखर) भारत में 1860 से बनी कानून में तीन महत्वपूर्ण व बड़ी अपराधिक धाराओं में परिवर्तन कर उसे नए कानून का रूप देकर आज से देश में लागू कर दिया गया है।जिस पर जनजागरूकता लाने एसडीओपी रागनी मिश्रा ने नागरिकों की बैठक लेकर विस्तृत जानकारी दी।सोमवार को कुरुद थाना में जनप्रतिनिधियों,पत्रकारों एवं नागरिकों की बुलाई गई बैठक में अनुविभागीय अधिकारी पुलिस रागनी मिश्रा एवं टीआई अरुण साहू ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि देशभर में 1 जुलाई से तीन बड़े अपराधिक कानून में बदलाव कर नए कानून लागू कर दिया गया है। जिसमें भारतीय दण्ड संहिता 1860 के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता 2023 को अधिसूचित किया गया है।पहले
भारतीय दण्ड संहिता की 511 धाराओं होती थी।जिसे कम कर उनके स्थान पर अब 358 धाराएँ होगी तथा 23 अध्याय के स्थान पर 20 अध्याय किया गया है।औपनिवेशिक कानूनों में बदलाव नागरिक केन्द्रित एवं कल्याणकारी अवधारणा
प्राथमिकता का निर्धारणमहिला सुरक्षा एवं न्याय
आतंकवाद, संगठित अपराध एवं भारत की सम्प्रभुता, एकता एवं अखण्डता के विरूद्ध अपराध पीड़ित केन्द्रित कानूनी प्रावधान अनुसंधान में वैज्ञानिक तकनीक, डिजीटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के प्रावधान न्यायालयीन प्रक्रिया से संबंधित प्रावधान190 से अधिक छोटे एवं बड़े बदलाव किए गए हैं।जिनमें कुल 20 नये अपराध शामिल है।पूर्व के कुल 19 प्रावधान हटाये गए (08 अपराधों सहित) है।नए कानून में कुल 41 अपराधों में सजा बढ़ाई गयी है। 83 अपराधों में अर्थदण्ड/जुर्माने की सजा बढ़ाई गयी है। 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान किया गया है।33 अपराधों में कारावास की सजा बढ़ाई गई है। 06 अपराधों में सजा के रूप में सामुदायिक सेवा की अवधारणा दी गई है। एसडीओपी श्रीमती मिश्रा ने बताई कि बड़े अपराध हत्या की धारा 302 के स्थान पर अब 103,दुष्कर्म की धारा 376 की जगह 64 एवं ठगी 420 की जगह 318 एवं एक्सीडेंट में किसी की मृत्यु हो जाने पर 304 ए में कुछ बदलाव कर संशोधन किए गए हैं।जिनमें दो धाराएं लगाई लगाई जाएगी।एक्सीडेंट होने के बाद अस्पताल, थाने में सूचना देने पर सम्बंधित चालक के विरुद्ध धारा 106 (1 ) तथा फरार हो जाने पर धारा 106 (2) कायम किया जाएगा। नए कानून को लेकर इसकी शीतलता और कठोरता को लेकर पूछे जाने सवालों पर पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रावधानों एवं कार्यवाही में आमनागरिकों को सरलता तो होगी किन्तु अपराधों की पुनरावृत्ति करने वाले आरोपियों के लिए नए कानून कठोर भी है।इसमें न्यूनतम सजा का प्रावधान किया गया है।नए कानून में बाल एवं महिला अपराधों पर अंकुश लगाने कोशिश होगी।नए कानून लागू करने का उद्देश्य एवं तीन बड़े अपराधों की बदलाव में ऐसा क्या खास प्रावधान किया गया है?पूछने पर बताया गया कि वर्षो से लागू संविधान में कुछ अनावश्यक धाराएं थी।जिसका वर्तमान परिवेश में उसका कोई उपयोग नही किया जा सकता था।साथ ही आज के आधुनिकता के दौड़ में हो रहे अपराध के नए नए तरीके के चलते कठोर कानून जरूरी हो गया था। जिसमें जुर्माना,आजीवन कारावास के साथ फांसी की सजा का भी प्रावधान किया गया है।रागिनी मिश्रा ने कहा कि भारत के हर नागरिकों को भारतीय दंड सहिंता की जानकारी होनी चाहिए।जिसके लिए ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार की जरूरत है।जिसके लिए उन्होंने जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों से सहयोग की अपेक्षा जताई।



