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दलित-आदिवासी संगठनों का भारत बंद, देशभर में दिखा मिलाजुला असर, छत्तीसगढ़ में प्रभाव, रायपुर में असर नहीं

दलित-आदिवासी संगठनों का भारत बंद, देशभर में दिखा मिलाजुला असर, छत्तीसगढ़ में प्रभाव, रायपुर में असर नहीं

नई दिल्ली। दलित और आदिवासी संगठनों ने बुधवार को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। यह बंद हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए मजबूत प्रतिनिधित्व और सुरक्षा की मांग को लेकर बुलाया गया है। ‘नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ दलित एंड आदिवासी ऑर्गेनाइजेशन्स’ (एनएसीडीएओआर) ने मांगों की एक सूची भी जारी की है। इसमें सबसे अहम अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) के लिए न्याय और समानता की मांग हैं। दलित और आदिवासी संगठन हाल में सुप्रीम कोर्ट की सात न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुनाए गए फैसले से सहमत नहीं है। संगठन ने मामले में विपरीत दृष्टिकोण अपनाया है। उनकी मानें तो यह ऐतिहासिक इंदिरा साहनी मामले में नौ न्यायाधीशों की पीठ केफैसले को कमजोर करता है, जिसने भारत में आरक्षण की रूपरेखा स्थापित की थी।

बिहार के पटना में भी अब भारत बंद का असर दिखने लगा है। अंबेडकर हॉस्टल के पास प्रदर्शनकारियों ने आगजनी की और अशोक राजपथ को जाम कर दिया। झारखंड में आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने एससी/एसटी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में और इसे वापस लेने की मांग को लेकर भारत बंद का आह्वान करते हुए प्रदर्शन किया।

संगठन की सरकार से क्या है मांग?
एनएसीडीएओआर ने सरकार से अनुरोध किया है कि इस फैसले को खारिज किया जाए, क्योंकि यह अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों के लिए खतरा है। संगठन एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण पर संसद द्वारा एक नए कानून को पारित करने की भी मांग कर रहा है, जिसे संविधान की नौवीं सूची में समावेश के साथ संरक्षित किया जाए।

 

 

रायपुर में बंद का कोई असर नहीं, छत्तीसगढ़ में मिलाजुला असर

रायपुर। एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमीलेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ देश भर के विभिन्न संगठनों ने आज यानी 21 अगस्त को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। दलित और आदिवासी संगठनों ने हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए मजबूत प्रतिनिधित्व और सुरक्षा की मांग को लेकर भारत बंद का ऐलान किया है। नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ दलित एंड आदिवासी ऑर्गेनाइजेशन्स ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए न्याय और समानता की मांग की है।

छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य प्रदेश है। यहां भी बंद का प्रभाव देखने को मिल रहा है। लेकिन राजधानी रायपुर की बात करें तो बंद का कोई असर नहीं है। रायपुर में सभी स्कूल-कॉलेज, बस सेवा, पेट्रोल पंप और दुकानें खुली हुई है। वहीं शहर में पुलिस अलर्ट मोड पर है। छत्तीसगढ़ में बंद के लिए बहुजन समाज पार्टी, सर्व आदिवासी समाज और भारतीय बौद्ध महासभा ने समर्थन दिया है।

इस प्रदर्शन को छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ और छत्तीसगढ़ चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स ने समर्थन नहीं दिया है। वहीं समाज के लोगों द्वारा राजधानी में रैली का आयोजन किया जा रहा है। दुकानों को बंद करने का प्रयास किया जा रहा है। राजधानी पुलिस अलर्ट मोड पर है जबरदस्ती बंद कराने या हुड़दंग हुई तो कार्रवाई होगी।

बिलासपुर शहर में भारत बंद का मिला-जुला असर दिखाई दे रहा है. कई जगह दुकानें खुली हुई है तो कहीं बंद है। कांकेर जिले में आदिवासी समाज के भारत बंद का व्यापक असर दिख रहा है। भानुप्रतापपुर, अंतगढ़, पखांजूर, दुर्गूकोंदल क्षेत्र में सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठान, शिक्षण संस्थान सहित आवागमन पूर्णतः बंद हैं। शासकीय कार्यालयों में बंद का प्रभाव दिखा रहा है। वहीं आम रास्ते को बाधित किया गया है। बंद से जन जीवन बुरी तरह प्रभवित हो रहा है।

Author Desk

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