मर जाना मंजूर लेकिन अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं : मदनी

मर जाना मंजूर लेकिन अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं : मदनी
नई दिल्ली। जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने वंदे मातरम् को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हमें किसी के वन्देमातरम् गाने या पढऩे पर आपत्ति नहीं है लेकिन मुसलमान अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि हम एक खुदा (अल्लाह) को मानने वाले हैं, अल्लाह के सिवा न किसी को पूजनीय मानते हैं और न किसी के आगे सजदा करते हैं। हमें मर जाना स्वीकार है, लेकिन शिर्क (खुदा के साथ किसी को शामिल करना) कभी स्वीकार नहीं! अरशद मदनी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में ये बात कही। उन्होंने लिखा कि हमें किसी के वंदे मातरम गाने या पढऩे पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन हम यह बात फिर से स्पष्ट करना चाहते हैं कि मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इस इबादत में किसी दूसरे को शरीक नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की कविता की कुछ पंक्तियां ऐसे धार्मिक विचारों पर आधारित हैं जो इस्लामी आस्था के खिलाफ हैं। विशेष रूप से इसके चार अंतरों में देश को दुर्गा माता जैसे देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया है और उसकी पूजा के शब्द प्रयोग किए गए हैं, जो किसी मुसलमान की बुनियादी आस्था के विरुद्ध हैं।



