छत्तीसगढ़

96 सालों का ब्रिटिश जमाने का स्कूल, ग्रामीणों ने किया शिक्षक की मांग

नगरी :- जहां 14 जुलाई 1985 को देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी का चरण पड़ा था, जिन्होंने धमतरी जिले के ग्राम दुगली पहुंच कर सबसे पहले प्राथमिक शाला दुगली के छात्र छात्राओं का हौसला बढ़ाए थे, जिनकी याद में छत्तीसगढ़ शासन में कांग्रेस सरकार की पूर्ण बहुमत की सरकार आने के तत्काल बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ पूरा केबिनेट के मंत्री पहूंचकर दुगली ग्राम में विशाल कार्यक्रम आयोजित कर दुगली में स्व. राजीव गांधी का आदमकद मूर्ति अनावरण किया गया है, वहीं उस स्कूल का हाल बेहाल है, जिस स्कूल में देश के प्रधानमंत्री का चरण पड़ा था, आज जर्जर स्थिति में है, शिक्षक विहिन है, ऐसे लाचार, बेबस, लकवाग्रस्त, प्रधानाचार्य के हाथों एवं एक मात्र ब्यवस्था शिक्षक हांथो स्कूल को संचालित किया जा रहा है, जिस वजह से दुगली स्कूल के छात्र छात्राओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है, जिस स्कूल को माडल स्कूल होनी चाहिए, जो स्कूल 96 साल से संचालित है, जहां प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी का चरण पड़ा था, जिनके बगल में राजीव गांधी का आदमकद स्मारक, जिनके नाम से छत्तीसगढ़ सरकार की में महत्वपूर्ण योजना संचालित है, उन्हीं की गोद ग्राम की स्कूल शिक्षक विहिन है, इस गंभीर मसला को लेकर दुगली कौव्हाबाहरा के ग्रामीण जिलाधीश के पास जनदर्शन में पहुंचे थे, अगर सात दिवस के अंदर शिक्षक ब्यवस्था नहीं हुई तो, पालक समिति और स्कूली छात्र छात्राओं और ग्रामीण मिलकर स्कूल को तालाबंदी करेंगे, यह निर्णय सर्वसम्मति से ग्रामीण निर्णय लेकर धमतरी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने, कलेक्ट्रेट पहुंचे रहे हैं, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजाराम मंडावी, सरपंच रामकुंवर मंडावी दुगली, सुरेन्द्र राज ध्रुव, रमाकांत तिवारी, राजेश्वर नेताम, बसंत टांडेश, भागीरथी सोरी, बसंत नरेटी, उप सरपंच कबिलास मरकाम कौव्हाबाहरा, रत्ना सिन्हा, रामेश्वर मरकाम, मयाराम टांडेश, हलाल सिंह यादव, दिनेश कुमार, महेश्वर, देवसंत, दिनेश, शंकर सेन, दयावती ध्रुव, जगोतीन, शशिकला, रेखा सहित सैंकड़ों ग्रामीण जनदर्शन पहुंच रहे हैं

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