नवदिवसीय श्रीरामकथा के दिव्य एवं ऐतिहासिक समापन पर आयोजक पं. राजेश शर्मा ने व्यक्त किया हृदय से आभार

धमतरी(प्रखर) शहर के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित नवदिवसीय श्रीरामकथा का भव्य, दिव्य एवं भावनात्मक समापन अपार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। नौ दिनों तक चले इस विराट आध्यात्मिक आयोजन ने संपूर्ण नगर और आसपास के अंचलों को धर्म, भक्ति और संस्कारों की सुगंध से आलोकित कर दिया। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु, मातृशक्ति, युवा एवं बच्चे रामकथा श्रवण हेतु उपस्थित रहे और प्रभु श्रीराम की लीलाओं में भाव-विभोर हुए।
समापन अवसर पर आयोजनकर्ता पं. राजेश शर्मा ने मंच से सभी के प्रति गहन कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह नवदिवसीय रामकथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला, संस्कारों को जागृत करने वाला और जीवन को दिशा देने वाला महायज्ञ रहा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की सफलता के पीछे जनमानस का अपार प्रेम, सहयोग और विश्वास निहित है।
पं. राजेश शर्मा ने विशेष रूप से विश्वप्रख्यात कथा वाचक आचार्य पं. अतुल कृष्ण भारद्वाज जी के चरणों में कृतज्ञता अर्पित करते हुए कहा कि महाराज श्री की ओजस्वी, सरल, सारगर्भित एवं भावपूर्ण वाणी से प्रवाहित श्रीरामकथा ने श्रोताओं के हृदय में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों—सत्य, धर्म, करुणा, त्याग, सेवा, प्रेम और कर्तव्य—को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। नौ दिनों तक चले कथा प्रवचन ने जनमानस को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ते हुए जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान की।
आयोजक ने कहा कि रामकथा के दौरान प्रतिदिन जिस प्रकार श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा, वह यह दर्शाता है कि आज भी समाज प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलने को आतुर है। उन्होंने नगर एवं ग्रामीण अंचलों से पधारे सभी श्रद्धालुओं, मातृशक्ति, वरिष्ठजनों, युवाओं, बच्चों तथा रामभक्तों का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया।
इसके अतिरिक्त पं. राजेश शर्मा ने मंच से समस्त संतजनों, विद्वान ब्राह्मणों, विशिष्ट अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, मीडिया प्रतिनिधियों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, सेवादारों, स्वयंसेवकों तथा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के समन्वित प्रयास से यह आयोजन शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और स्मरणीय बन सका।
समापन अवसर पर आयोजक ने कहा कि श्रीरामकथा केवल मंच से कही जाने वाली कथा नहीं, बल्कि जीवन को मर्यादा, संस्कार और सेवा के पथ पर ले जाने वाली जीवंत प्रेरणा है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने आचरण में उतारें और एक सशक्त, संस्कारित एवं समरस समाज के निर्माण में सहभागी बनें।
अंत में श्रीराम नाम के जयघोष, भजनों और भाव-विभोर वातावरण के बीच नवदिवसीय श्रीरामकथा का गरिमामय समापन हुआ, जिसने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति और संस्कारों की अमिट छाप छोड़



