छत्तीसगढ़

महात्मा गांधी कोई व्यक्ति नहीं एक विचारधारा है उसे कैसे मारोगे :- तारिणी चंद्राकर

प्रभारी मंत्री के द्वारा गोडसे को राष्ट्रवादी बताना महात्मा गांधी जी एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान

धमतरी (प्रखर)भाजपा द्वारा चलाए जा रहे विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) जन जागरण अभियान के तहत जिला भाजपा कार्यालय प्रेसवार्ता करने पहुंचे प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा के द्वारा नाथूराम गोडसे को राष्ट्रवादी बताए जाने को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने भारतीय जनता पार्टी के विचारधारा को गोडसे समर्थित विचारधारा कहते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान बताया है. भाजपा सरकार आज लगातार संवैधानिक संस्थाओं को खत्म करने के साथ-साथ देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, महापुरुषों के इतिहास को धूमिल करने का कार्य कर रहीं है. देश के गृह मंत्री से लेकर आज धमतरी जिले के प्रभारी मंत्री तक के इनके नेतागण जिन लोगों ने संविधान को कबूल नहीं किया 52 साल तक तिरंगा झंडा तक नहीं फहराया ऐसे लोगों को देश के लिए मरने की विचारधारा बता रहे हैं. ऐसी विचारधारा को देश के लिए मरने की नहीं बल्कि देश की मुखबिरी करने की विचारधारा कहते है. प्रभारी मंत्री जी ने गोडसे को राष्ट्रवादी कहकर महात्मा गांधी जी के त्याग समर्पण और उनके विचारों की हत्या का कार्य किया है. लेकिन भाजपा के नेताओं को समझना चाहिए की महात्मा गांधी व्यक्ति नहीं एक विचारधारा है. लाख कोशिशो के बावजूद गांधी जी के विचारों के ऊपर गोडसे की विचारधारा को नहीं थोप पाएंगे. भाजपा के नेता दुनिया के अन्य देशों में जाकर महात्मा गांधी जी के सामने सर झुकाते हैं अन्य देशों से आए राष्ट्र अध्यक्षों के साथ फूल चढ़ाते है. और उन्हीं के देश में उनके नाम को हटाने का कार्य करती है. भाजपा की दोहरा चरित्र से पूरा देश वाकिफ हो गया है. आगे कहा की आज गोडसे को भगत सिंह का दर्जा देने की कोशिश चल रह रही है. गोडसे ने गांधी को मारा था. शायद भाजपा गोडसे को जब भगत सिंह की तरह राष्ट्रीय हीरो हो बना पाएंगे, तब तीस जनवरी का क्या होगा? अभी तक यह ‘गांधी निर्वाण दिवस है’, आगे ‘गोडसे गौरव दिवस’ हो जाएगा. जब तीस जनवरी को गोडसे की जय-जयकार होगी, तब यह तो बताना ही पड़ेगा कि उसने कौन-सा महान कर्म किया था. बताया जाएगा कि इस दिन उस वीर ने गांधी को मार डाला था. आगे कहा की प्रभारी मंत्री ने कुतर्क करके यह तो बताया कि खेल रत्न पहले राजीव गांधी जी के नाम से था. लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि देश के प्रधानमंत्री को कौन से खेल मे महारत हासिल था जिनका नाम देश के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम के नाम पर भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम हटा कर रखा गया है. आगे कहा की मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों गरीब, मजदूर और श्रमिक परिवारों के लिए रोज़गार और सम्मान की गारंटी है मनरेगा का नाम महात्मा गांधी से जुड़ा है, जिन्होंने सत्य, अहिंसा और श्रम की गरिमा का संदेश दिया। इस योजना के नाम को बदलना   गांधी के विचारों और उनके योगदान का अपमान है। सरकार योजनाओं के नाम बदलकर इतिहास और जनभावनाओं से खिलवाड़ कर  है. गोडसे के विचारधारा को जनमानस के ऊपर थोपने का असफल प्रयास कर रहीं है।

Author Desk

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button