छत्तीसगढ़

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सशक्तिकरण का संदेश, समाज में समान अवसर की आवश्यकता पर जोर


धमतरी। प्रतिवर्ष 8 मार्च को विश्वभर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिवस महिलाओं की उपलब्धियों, उनके संघर्ष और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं के सम्मान के साथ-साथ यह दिन महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता का संदेश भी देता है।
इतिहास के पन्नों पर नजर डालें तो प्राचीन काल से ही महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वेद और उपनिषद के समय में महिलाओं को समाज में उच्च स्थान प्राप्त था तथा उन्हें शिक्षा प्राप्त करने और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने की अनुमति भी थी। उस समय कई विदुषी महिलाओं ने ज्ञान और विचार के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। समय के साथ समाज में कई रूढ़िवादी परंपराएं विकसित हुईं, जिसके कारण महिलाओं की स्थिति में बदलाव आया और उन्हें अनेक सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद कई महान महिलाओं ने अपने साहस, ज्ञान और दृढ़ संकल्प से समाज में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल महिलाओं को अधिकार देना ही नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत बनाना भी है, ताकि वे अपने जीवन से जुड़े निर्णय स्वयं ले सकें और अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें। किसी भी महिला के सशक्त होने की शुरुआत उसके परिवार से होती है। माता-पिता को चाहिए कि वे बेटा और बेटी दोनों को समान दर्जा दें तथा उनके बीच किसी प्रकार का भेदभाव न करें। परिवार ही वह स्थान है जहां से एक बेटी को साहस, आत्मविश्वास, परिश्रम और जीवन की चुनौतियों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है।
परिवार का वातावरण और माता-पिता का सहयोग बेटियों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बेटियों को शिक्षा के समान अवसर देना, उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना और उनके मनोबल को ऊंचा रखना समाज के हर परिवार की जिम्मेदारी है। एक शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला न केवल अपने परिवार बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
महिलाओं को भी चाहिए कि वे स्वयं पर विश्वास रखें और अपने भीतर आत्मविश्वास, साहस, तर्क-वितर्क की क्षमता तथा परिश्रम जैसे गुणों को विकसित करें। उन्हें शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों तथा कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। वर्तमान समय में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए अनेक कानून बनाए गए हैं, जिनकी जानकारी होना भी अत्यंत आवश्यक है।
जब तक महिलाएं स्वयं अपने अधिकारों के लिए खड़ी नहीं होंगी, तब तक समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं है। इसलिए महिलाओं को अन्याय, शोषण और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए। महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए गए प्रयास तभी सफल होंगे, जब महिलाएं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगी और समाज के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाएंगी।
महिलाएं केवल परिवार की ही नहीं बल्कि पूरे समाज की शक्ति होती हैं। वे विभिन्न भूमिकाओं में रहकर समाज का निर्माण करती हैं और आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा प्रदान करती हैं। जब एक महिला शिक्षित और सशक्त होती है तो पूरा परिवार और समाज प्रगति की ओर अग्रसर होता है। इसलिए आवश्यक है कि हम सभी मिलकर महिलाओं को सम्मान, समान अवसर और सुरक्षित वातावरण प्रदान करें, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
नारी तुम हो जगत जननी,
हो तुम सबकी पालनहार।
तुम नहीं तो जग अंधियारा,
अलग-अलग किरदार में तुम्हारी पहचान।
हो तुम ईश्वर की अनोखी संतान।
— डॉ. यशोदा साहू
सहायक प्राध्यापक (इतिहास)
यशवंतराव मेघावाले शासकीय महाविद्यालय, मगरलोड, जिला धमतरी।

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