विश्व नवकार दिवस पर विशेष: आस्था, अनुशासन और साधना का प्रेरणादायक उदाहरण बने हितेश चोपड़ा

आशीष बंगानी
धमतरी(प्रखर)विश्व नवकार दिवस के पावन अवसर पर जहां पूरे विश्व में जैन धर्मावलंबियों द्वारा नवकार महामंत्र का सामूहिक जाप कर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया गया, वहीं धमतरी के चॉइस सेंटर संचालक हितेश चोपड़ा ने अपनी निरंतर साधना और अनुशासन से समाज के सामने एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी यह साधना न केवल जैन समाज बल्कि समूचे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनती जा रही है।
पिछले तीन वर्षों से हितेश चोपड़ा निरंतर नवकार महामंत्र का लेखन कर रहे हैं। उनकी इस तपस्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक वे 22 हजार 222 बार नवकार महामंत्र का लेखन पूर्ण कर चुके हैं। यह केवल एक संख्या नहीं, बल्कि उनके अटूट विश्वास, धैर्य और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक है।
बताया जाता है कि उन्हें इस साधना की प्रेरणा गुजरात प्रदेश में स्थित गिरनार तीर्थ में एक जैन संत के सानिध्य में प्राप्त हुई थी। उस दिव्य प्रेरणा को उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया और तब से आज तक बिना किसी दिखावे के, पूरी निष्ठा के साथ इस कार्य में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि नवकार महामंत्र का लेखन मन को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक संतुलन प्रदान करता है।
आज के आधुनिक युग में, जहां लोग सोशल मीडिया और व्यस्त दिनचर्या में उलझे रहते हैं, वहां हितेश चोपड़ा का यह समर्पण विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वे अपने दैनिक कार्यों के बीच समय निकालकर नियमित रूप से नवकार मंत्र का लेखन करते हैं, जो यह संदेश देता है कि यदि इच्छाशक्ति और श्रद्धा हो, तो आध्यात्मिक साधना के लिए समय निकालना कठिन नहीं है।
जैन धर्म में नवकार महामंत्र को अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली माना गया है। यह मंत्र किसी एक व्यक्ति या देवता का नहीं, बल्कि समस्त सिद्धों, आचार्यों, उपाध्यायों और साधुओं को नमन करने का प्रतीक है। मान्यता है कि इसके जाप और लेखन से व्यक्ति के भीतर की नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में शांति, समृद्धि एवं सद्भाव का संचार होता है।
धमतरी का जैन समाज हितेश चोपड़ा की इस साधना पर गर्व महसूस कर रहा है। समाज के वरिष्ठजनों का कहना है कि ऐसे समर्पित व्यक्तित्व समाज की पहचान होते हैं, जो नई पीढ़ी को धर्म, संस्कार और अनुशासन की ओर प्रेरित करते हैं।
विश्व नवकार दिवस के अवसर पर हितेश चोपड़ा की यह साधना यह संदेश देती है कि सच्ची श्रद्धा और निरंतर प्रयास से व्यक्ति आध्यात्मिक ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। उनका यह प्रयास निश्चित ही आने वाले समय में और अधिक लोगों को धर्म और साधना के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेगा।



