आपको किसी की जान लेने का हक नहीं क्योंकि आप उसे पुनः जीवित नहीं कर सकते : साध्वी शुभंकरा श्रीजी

रायपुर। किसी को दुखी कर अगर आपको शांति मिलती है, खुशी मिलती है तो आप समझ लीजिए कि आपका भविष्य बहुत ही अंधकारमय होगा। इस कुकृत्य का कौन हमसे कब और कितना भयावाह बदला लेगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। पर्यूषण पर्व क्षमादान देने का पर्व है। इन 8 दिन हमें हरे वनस्पतियों का त्याग, वाशिंग मशीन, एसी, फ्रिज का उपयोग नहीं करना है, पानी का उपयोग भी छन्नी लगाकर करना है, हिंसात्मक कार्यों से बचना और अभय दान देना है। यह प्रेरक बातें एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मास 2023 की प्रवचन श्रृंखला के दौरान पर्युषण पर्व के दिन नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कही।
उन्होंने कहा कि कल्पसूत्र की शुरुआत ही प्रथम अक्षर ‘णमो’ से हुई है। अर्थात् पंच परमेष्ठी को नमन करते हुए नवकार महामंत्र से इसकी शुरुआत है। इससे हमें यह प्रेरणा मिलती है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत विनम्रता और भगवान के स्मरण से की जानी चाहिए। हजारों सालों से इस सूत्र का पारायण किया जाता रहा है। संपूर्ण जिनशासन में इस महान आगम कल्पसूत्र का अत्यंत महत्व है।
साध्वीजी कहती है कि आपको अपने घर के सामने झाड़ू लगाना हो तो आप खरेटा झाड़ू से सफाई करते हो, जो एक प्रकार से कंटीला होता है। जब आप नहा कर निकलते हैं तो अपने शरीर को पोंछने के लिए आपको मखमली टॉवेल की जरूरत पड़ती है। पर आपका यह शरीर तो बोरे और टाटपट्टी से भी पोंछा जा सकता है, लेकिन आप ऐसा करते नहीं हो क्योंकि वह दरदरी होती है और आपको चूभती भी है। क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि जब घर के बाहर आप खरेटा झाड़ू लगाते हैं तो कितने जीवों को वह झाड़ू चुभती होगी और कुछ की तो जान ही चली जाती होगी। हम किसी को जीवनदान दे नहीं सकते तो हमें किसी की जान लेने का हक भी नहीं है। एक बार कोई जीव आपके हाथों से मर गया तो उसे आप जीवित नहीं कर सकते और यह आपके हाथ में भी नहीं है।
साध्वीजी कहती है कि आप किसी को गिफ्ट के बदले गिफ्ट और लिफाफा के बदले लिफाफा दे सकते हैं पर जीवन के बदले जीवन देने की ताकत आपमें नहीं है। हिंसक केवल जीव हत्या ही नहीं है, मन वचन और काया से भी हिंसा होती है। आप घर के दरवाजे-खिड़की भी बंद कर रहे हैं तो यह ध्यान रखें कि आसपास कोई खड़ा ना हो या दरवाजे में कोई जीव बैठ ना हो। दरवाजे खिड़कियों भी आपको विवेक से बंद करना होगा। वैसे ही आप सुबह घर में गैस चूल्हा जलाने से पहले उसे पोंछ ले क्योंकि रात में गिरे हुए दूध के अंश में भी कई जीवों की उत्पत्ति हो जाती है। अपनी दोपहिया-चारपहिया वाहन चालू करने से पहले आप गाड़ी के नीचे एक बार चेक कर लीजिए की कोई कुत्ते, बिल्ली या अन्य जीव तो वहां पर नहीं है।
साध्वीजी बताती है कि एक बार की बात है पांच दोस्त घूमने गए थे और एक जगह पर वे चाय पीने रुके। चाय-नाश्ता करने के बाद जब वे वहां से निकलने लगे तो उनकी गाड़ी चालू नहीं हो रही थी। उन्होंने बहुत चाबी घुमाई और गाड़ी को धक्का मार कर भी देख लिया फिर भी वह स्टार्ट नहीं हुई। उनकी गाड़ी के नीचे कुत्ते के बच्चे थे और जब वह बच्चे गाड़ी के नीचे से निकले तो गाड़ी स्टार्ट हो गई। जब वे आगे बढ़े तो उन्होंने देखा कि गाड़ी के नीचे कुत्ते के छोटे-छोटे बच्चे थे तो उन्होंने ईश्वर का धन्यवाद दिया कि अच्छा हुआ उस समय उनकी गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई। ईश्वर को धन्यवाद देते ही देते उनके आंखों के सामने एक बहुत बड़ा एक्सीडेंट हो गया और वे सभी समझ गए कि अगर गाड़ी स्टार्ट होती तो कुत्ते के बच्चे भी मर जाते और हम भी शायद हम उस दुर्घटना का शिकार हो सकते थे।
भक्तिरस से सराबोर हो रहे श्रावक
मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष सुशील कोचर और महासचिव नवीन भंसाली ने बताया कि पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के तृतीय दिवस भक्ति संध्या में धमतरी की विधि लालवानी और निधि लालवानी ने अपनी संगीतमयी प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। भक्ति संध्या के लाभार्थी परिवार सरसदेवी ममता, विरेंद्र, श्रेयस पारख परिवार, दाढ़ी-रायपुर है। साथ ही प्रतिदिन दादा गुरूदेव की इकतीसा रात 8 से 9 बजे तक चल रही है और रात 9 से 10 बजे तक प्रभु की भक्ति की जा रही है।



