छत्तीसगढ़

भगवान महावीर की समता, क्षमा, प्रेम और करुणा को अपने जीवन में उतारें : साध्वी शुभंकरा श्रीजी

रायपुर। यह हमेशा याद रखें कि महापुरूषों का जीवन केवल सुनने के लिए नहीं होता बल्कि उनका जीवन चरित्र हमारे जीवन में चरित्र निर्माण के लिए होता है। जब हम कल्पसूत्र में प्रवेश करते है तो हमें पता चलता है कि किस तरह भगवान महावीर स्वामी ने कान में कील ठुकवा लिए। उस प्रसंग को याद कर हमें यह संकल्प लेना होगा कि जैसे मेरे भगवान ने कानों में कील ठुकवाए, मैं कम से कम कड़वे शब्द तो जरूर सुन सकता हूं। यह बातें एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मास 2023 की प्रवचन श्रृंखला के दौरान पर्युषण पर्व के छठवें दिन नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कही।

उन्होंने आगे कहा कि चण्डकौशिक नामक जहरीले सांप ने उनके अंगूठे पर डंक मारा, यदि भगवान जहरीले सर्प से अपने आपको डसवा सकते है तो छोटे-मोटे मच्छर आदि कीड़े-मकोड़ों से मैं अपने आपको प्रभावित नहीं करूंगा। जब–जब चंदनबाला का चरित्र सुनें तो मन को इस बात के लिए जरूर तैयार कीजिएगा कि चंदनबाला ने जीवन में आने वाली इतनी तकलीफों को सहन किया तब भी जीवन में कभी भी उफ नहीं किया। छोटी-मोटी तकलीफें मेरे जीवन में आएंगी तो भी मैं अपने चित्त को प्रभावित नहीं करूंगा। महापुरूषों का जीवन चरित्र हम अपने चरित्र का निर्माण करने के लिए सुनते हैं। ताकि हम भी वैसा ही निर्मल और पवित्र जीवन जी सकें।

साध्वीजी कहती है कि आज आप देखेंगे तो पहले के पहनावे और आज के पहनावे में जमीन-आसमान का अंतर है। पहले सभी लोग बहुत ही साधारण और सोबर कपड़े पहनते थे लेकिन अब हर दिन के लिए, हर कार्यक्रम के लिए, सुबह से लेकर रात तक लोग अलग-अलग कपड़े पहनते है। शादी-पार्टियों के लिए अलग ड्रेस, मंदिर जाने के लिए और पूजन-अनुष्ठान के लिए अलग कपड़े लोग पहन रहे है। हमें भारतीय संस्कृति के अनुसार कपड़े पहनने चाहिए। लोग आज वेस्टर्न कल्चर अपना रहे है। यह अच्छा नहीं लगता है, हम बार-बार आपको टोकते है तो कोई कारण जरूर होता है, आपको ऐसा नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक बार ही नहीं हर बार, चातुर्मास में हर साल आपके नगर में कोई न कोई साधु-साध्वी आपके नगर में आएंगें। सभी के उदाहरण अलग-अगल जरूर हो सकते है पर सार सभी का एक ही होता है । हम हर साल प्रवचन सुनने आते है और पंडाल से बाहर जाते ही सब भूल जाते है। हमें अपना जीवन बनाने के लिए प्रवचन सुनना है। ऐसा बिल्कुल मत करना कि एक कान से सुना और दूसरे से निकाल दिया। हालांकि यह सब बोलने की बातें होती है कि सुना और निकाल दिया लेकिन ऐसा कभी होता नहीं है, आपने कभी किसी बात को सुना तो वह वाक्य आपके दिमाग में जाकर स्टोर हो जाता है। याद तो वह हमेशा रहता है लेकिन यह हम पर निर्भर करता है कि किन बातों को हमें प्राथमिकता देना है।

Author Desk

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