आप रोज मंदिर जाते हो, लेकिन क्यों जाते यह आपको खुद नहीं पता : साध्वी शुभंकरा श्रीजी

रायपुर। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि भगवान की भक्ति करने वाले पर भगवान हमेशा अपनी कृपा बरसाते हैं। आपको भक्ति करना है तो भगवान में पूरी तरह लीन हो जाइए, कौन क्या बोल रहा है यह मत सोचिए। भगवान की भक्ति करना है तो मीराबाई जैसी कीजिए जिन्होंने आंख मूंद कर भगवान कृष्ण की भक्ति की थी। परमात्मा की भक्ति में लीन हो जाओगे तो आपके जीवन का उद्धार हो जाएगा। जब आप मंदिर जाते हो तो कभी आपने अपने आप से यह पूछा है कि मैं मंदिर क्यों जा रहा हूं। आप जब डॉक्टर के पास जाते हो तो आपको यह पता रहता है कि आपको क्या परेशानी है और डॉक्टर उसका समाधान करेगा। पर आप डॉक्टर के पास तब जाते हो जब आपको कोई परेशानी होती है। लेकिन मंदिर आप नियमित जाते हो, आपको पता भी नहीं कि आप मंदिर क्यों जा रहे हो। घर वालों ने बोल दिया कि रोज मंदिर जाना है। मंदिर जाने का रोज का रूटीन बनाकर बस जा रहे हो और भगवान के दर्शन करके आ रहे हो। ना आपको पूजन विधि के बारे में पता है ना मंदिर के महत्व के बारे में पता है फिर भी आप बस हर दिन एक चक्कर मंदिर का मार ही लेते हो। हम जब कोई व्यापार करने की सोचते है तो यह देखते है कि इस व्यापार में हमें कितना फायदा होगा और जब आपकी कमाई होती है तो आप उस काम को और अच्छे से करने लगते हो। ऐसा आप इसलिए करते हो क्योंकि व्यापार में होने वाली कमाई आपको प्रत्यक्ष रूप से नजर आती है। परमात्मा के दर्शन करने, पूजा पाठ करने से आपको क्या लाभ हो रहा है यह दिखाई नहीं देता फिर भी आप हर रोज नियमित रूप से मंदिर जा रहे हो।
साध्वी जी कहती है कि परमात्मा की भक्ति आपको अपनी आत्मा का भान कराती हैं। आप मंदिर जाते हो और जैसे ही भगवान को देखते हो तो आपका मन कितना भी अशांत हो, वह प्रसन्नचित हो जाता है। परमात्मा की पूजा पाप-ताप और संताप सबको दूर कर देती है। ताला दिखने में कितना भी कठोर हो, भारी हो पर अपनी चाबी से वह आसानी से खुल जाता है। वैसे ही इस जीवन में हमें मोक्ष रूपी ताले को परमात्मा के आशीर्वाद रूपी चाबी से खोलना है। जैसे एक अंधेरे कमरे में एक बटन दबाने से लाइट चालू हो जाती है और पूरे कमरे को उजाले से भर देती है वैसे ही हमें अपने मन से उन कर्मों को हटाना है जिन्होंने हमारे मन पर अपना अंधेरा बिखरा हुआ है।
साध्वी जी कहती है कि हम परमात्मा का दर्शन स्वयं के लिए कर रहे हैं। हम सोचते हैं कि पत्थर की मूर्ति हमें आत्मा का भान कैसे कराएगी। जैसे हमें स्कूल में ए फॉर एप्पल और क के कमल को चित्र दिखाकर समझाया जाता है, वैसे ही परमात्मा की प्रतिमा हमें उनके गुना का भान कराती है। शास्त्रों के माध्यम से और भगवान की प्रतिमा के द्वारा हम अपने आप को पहचान सकते हैं।



