
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा पत्र लिखकर हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल खनन के लिए जमीन देने की मांग करना इस बात का प्रमाण है की भूपेश बघेल की सरकार हसदेव अरण्य में कोल खनन के खिलाफ है। भूपेश सरकार ने 27 जुलाई 2022 को हसदेव अरण्य के पांच कोल ब्लॉक आवंटन निरस्त करने विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके केंद्र की मोदी सरकार को भेजा है जो अब तक लंबित है। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल बताएं आखिर मोदी सरकार इन कोल ब्लॉक के आवंटन को निरस्त क्यों नहीं कर रही है? मोदी सरकार से राजस्थान सरकार को दी गई कोल ब्लॉक को निरस्त कर दूसरे जगह देने का आग्रह किया जा रहा है। लगातार राज्य सरकार मोदी सरकार से हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल खनन की अनुमति नहीं देने की मांग कर रही है। लेकिन मोदी सरकार कान में रूई डालकर प्रदेश की जनता की आवाज को अनसुना कर रही है।
धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि रमन सरकार के समय अडानी को दंतेवाड़ा जिले की बैलाडीला खदान जिस पर एनएमडीसी का आधिपत्य रहा है उसके 13 डिपॉजिट को सौंप दिया गया था। कोयला खदानों के अलावा अडानी को लोहे की खदान भी दिया गया था। कोल कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए रमन सरकार ने स्टाम्प ड्यूटी में 3000 करोड़ रुपए की छूट देकर राज्य के खजाने को चोट पहुंचा था। वर्तमान में मोदी सरकार एससीईएल के अधीन के 80 प्रतिशत खदानों को आडनी को दे दिया गया। नगरनार संयंत्र को भी अडानी को सौंपने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार के द्वारा लगातार हसदेव क्षेत्र में आवंटन किए गए कोल ब्लॉक को रद्द करने की मांग केंद्र सरकार से की जा रही है। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल बताएं आखिर मोदी सरकार आबंटित कोल ब्लॉक को रद्द करने में क्यों डर रही है? भाजपा को अडानी के द्वारा चुनाव में भारी भरकम रकम दी जाती है क्या उसका कर्ज उतारने मोदी सरकार कोल आबंटन रद्द नही कर रही है? भाजपा के 9 सांसदों ने कोल ब्लॉक आबंटन निरस्त कराने क्या प्रयास किया? अभी अमित शाह छत्तीसगढ़ आने वाले है तो भाजपा शाह के सामने कोल ब्लॉक रद्द करने की मांग करेंगे? जबकि यूपीए के समय तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र और तमोर पिंगला को अति जैव विविधता महत्वपूर्ण क्षेत्र मानते हुए नो गो एरिया घोषित कर खनन गतिविधियां प्रतिबंधित की थी जिसे मोदी सरकार ने संकुचित कर माइनिंग शुरू करवाया था।



