छत्तीसगढ़ महतारी के वीर सपूत व महान क्रांतिकारी शहीद वीर नारायण सिंह जी की पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन- महापौर विजय देवांगन
धमतरी — गोड़ समाज विकास समिति धमतरी के द्वारा शहीद वीर नारायण सिंह समुदायिक भवन स्थित छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद वीर नारायण सिंह प्रतिमा में माल्यार्पण कर 166 वॉ शहादत दिवस मनाया गया शहीद वीर नारायण का जन्म 1795 में सोनाखान रामसाय बिंझवार जमीदार परिवार में हुआ था। उनके पिता जीवनभर अंग्रेजों और भोसले के विरुद्ध संघर्ष करते रहे। शहीद वीर नारायण भी उनके नक्शे कदम पर चलते हुए अंग्रेजों से लड़ते रहे। 10 दिसंबर 1857 को उन्हें रायपुर के जयस्तंभ चौक पर फांसी पर लटकाया गया था। शहादत दिवस के मुख्य अतिथि महापौर विजय देवांगन रहे,एमआईसी सदस्य राजेश ठाकुर,कमलेश सोनकर,राजेश पांडेय,चोवाराम वर्मा,पार्षद दीपक सोनकर,सविता तोमन कवंर सहित अतिथियों ने वीर नारायण सिंह के द्वारा देशराष्ट्र निर्माण में दिए गए उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
महापौर विजय देवांगन ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी के सच्चे सपूत वीर नारायण सिंह ने सन् 1857 में देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में छत्तीसगढ़ की जनता में देशभक्ति का की भावना का संचार किया। सन् 1856 के भयानक अकाल के दौरान गरीबों को भूख से बचाने के लिए उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ कठिन संघर्ष किया और अपने प्राण न्योछावर कर दिए। शहीद वीर नारायण सिंह के देश की आजादी तथा मातृभूमि के प्रति समर्पण, बलिदान को हमेशा याद किया जाएगा।
एमआईसी सदस्य एवं पार्षद ने कहा की छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद वीरनारायण सिंह का शहादत दिवस 10 दिसंबर को है। 1857 में रायपुर के जयस्तंभ चौक पर अंग्रेजों ने वीर नारायण सिंह को फांसी पर लटकाने के बाद तोप से उड़ा दिया था। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के गौरवशाली इतिहास में छत्तीसगढ़ के वीर सपूत शहीद वीर नारायण सिंह के बलिदान को हमेशा याद किया जाएगा।
इस अवसर पर समाज के प्रमुख शिवचरण नेताम जिला अध्यक्ष,आनंद राम ठाकुर संरक्षक,जयपाल सिंह ध्रुव तह.अध्यक्ष, संतोष ध्रुव कोषाध्यक्ष,नंदा धुव्र,शिव नेताम सामाजिक कार्यकर्ता,हरिशंकर मरकाम,कृष्णा नेताम,दिग्विजय सिंह,टिकेश मंडावी,नीरज मंडावी,हेमंत पाले,रवि नेताम,शंकर नेताम,चंद्रप्रभा नेताम,दुर्गा नेताम,दीपिका ध्रुव, मोनिका नेताम सही समाज जन अधिक संख्या में उपस्थित थे।
