धमतरी में माफिया राज — रात्रि में हाईवा के लाईट से जगमगानें लगता है महानदी का तट..रेत खदानों से बदस्तूर जारी है अवैध उत्खनन व परिवहन..जिम्मेदार अधिकारियों के कार्य प्रणाली पर उठ रहे है कई सवाल ??
धमतरी– धमतरी जिला खनिज सम्पदा से परिपूर्ण है। जहां महानदी का उदगम स्थल नगरी के सिहावा श्रृंगी ऋषि आश्रम से हुआ है। जहां पीला सोना का काला खेल सफेदपोश नेता और जिम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण में चल रहा है। धमतरी जिला में अनेक रेत खदान है जिसे पीला सोना के नाम से जाना जाता है।यहां के रेत की क्वालिटी एक नंबर है जिसका डिमांड छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश, और महाराष्ट्र में अच्छी खासी डिमांड है। जिस पर सत्ताधारी सफेदपोश नेता और मंत्रियों की गंद्दी नजर हमेशा लगी रही है।
जहां सूत्रों की मानें तो पहले 15 साल से सत्ता में रही भाजपा के कई तथाकथित नेता और मंत्री करोड़ों रूपये कमा के निकल चुके है।
वही अब 15 साल के बनवास झेलनें के बाद सत्ता में काबिज कांग्रेस के कई तथाकथित दिग्गज नेता और मंत्री इस अवैध रेत उत्खनन और परिवहन में लिप्त है। जिसके दबाव के चलते अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर कार्रवाई करने से धमतरी जिलें के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी ड़रते है कही हमारा ट्रांसफर बस्तर ना करा दें।
अभी धमतरी जिला में जिस तरह से रेत माफिया दबंगई के साथ रात्रि में जेसीबी मशीन से अवैध रेत उत्खनन कर रहे है। धमतरी जिला के चारों विकास खंड- धमतरी, कुरूद, मगरलोड, और नगरी खासकर धमतरी विकास के अंतर्गत आने वाले रेत खदान अमेठी, मथुराडी , परसुली, दर्री, खरेंगा, सारंगपुरी, भरारी, दोनर, बारना, सेमरा, जंवरगांव, औरद ,लीलर इत्यादि रेत खदानों में मनमाना ढंग से लगातार रात्रि में जेसेबी मशीन से रेत उत्खनन हो रहा है और जिलें के जिम्मेदार अधिकारी जिस तरह से कार्यवाही करने से बच रहे है। जिससे शहर के चौक चौराहे में तरह-तरह की बातें हो रही है। कुछ लोगों का कहना है की इसमें बडे दबंग नेताओं का संरक्षण है जिसके कारण अधिकारी कार्यवाही करने के बाजय मौन है। कुछ लोगों का कहना है की महानदी का रेत खदान बहती गंगा है जिसमें संबंधित जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी से लेकर कई सफेदपोश नेता और मंत्री यहां तक खदान से लगे गांव के लोग भी बहती गंगा में डूबकी लगाने में लगें है। जिसके चलते इस क्षेत्र के सड़क की स्थिति काफी दयनीय है। आए दिन जर्जर सड़क के कारण लोग सड़क दुर्घटना में असमय काल के गाल में समा रहे है। अब तक इस क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक परिवार सड़क दुर्घटना का शिकार हो चुके है। जिसमें कई बच्चें अनाथ हो चुके है, कई महिलाएं विधवा हो चुकी है,कईयों के सिर से जीने का सहारा छिन गया।
रेत माफिया पैसे कमाने के चक्कर में भारी वाहन को प्रतिबंधित क्षेत्र में भी ओवरलोड हाईवा गाडी चला रहे है। इन खदानों के कारण गांव को शहर से जोडने वाली प्रधानमंत्री सडक की स्थिति भी काफी खराब हो रही है।
अभी वर्तमान अमेठी, परसुली, मथुराडीह, सारंगपुरी, भरारी के खदानों में भारी वाहन हाईवा गाडी की लम्बी लाईन लगी है। दूर से देखने पर यैसा प्रतीत हो रहा है मानों दिवाली पर्व में गांव लाईट से जगमगा रहा हो।
रेत माफिया का आतंक इतना है की गांव के लोग और जिम्मेदार लोग भी इस अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ नही बोल पाते है। इतना ही नही रेत माफियाओं का दहशत सिर्फ गांव में ही नही बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों के मन में भी है इसलिए अधिकारी कर्मचारी भी रेत खदानों में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के खिलाफ कार्यवाही नही करते है।
अगर अधिकारी दिखावें के लिए भी दो चार हाईवा और एकांत जेसेबी मशीन में कार्यवाही करता है तो ऊपर से कुछ तथाकथित सफेदपोश नेता और मंत्रियों का फोन आ जाता है जिसके दबाव के कारण भी अधिकारी मौन रहने को मजबूर है। यैसा स्थिति पहले यूपी में अखिलेश यादव के शासनकाल में देखने को मिलता था।
वही अब यूपी में बुलडोजर वालें बाबा ने माफियाओं और गैगस्टर के खिलाफ एनकाउंटर अभियान छेड़ रखा है जिसके चलते यूपी में गुंडाराज,माफिया राज, समाप्त हो चुका हैं। बचे हुए कुछ माफिया और गुंडा छत्तीसगढ़ में आ चुके हैं जो रेत के अवैध करोबार में लगे हुए थे। जिसका खुलासा कुछ वर्ष पहले एक रेत खदान में धमतरी के जिला पंचायत सदस्य खुबलाल ध्रुव और उनके साथियों के साथ जमकर मारपीट किये थे। जिस पर आदिवासी समाज ने तत्काल संलिप्त दोषियों के ऊपर कार्यवाही की मांग की, जिस पर आगे पुलिस ने कार्यवाही भी किया।
सत्ता में काबिज सभी राजनीतिक पार्टियों के तथाकथित सफेदपोश नेता और मंत्रियों के लिए धमतरी जिला का रेत खदान अवैध कमाई का जरिया बन गया है। चाहे सत्ताधारी कांग्रेस हो या वर्तमान विपक्ष में भाजपा हो दोनों पार्टियों के कार्यकाल में धमतरी जिलें के रेत खदानों का जमके दोहन हुआ है। लेकिन क्षेत्र के बहुप्रतीक्षित मांग कोलियारी से लेकर बारना तक सड़कचौडीकरण अब तक पुरा नही हुआ हैं। इस पर सिर्फ राजनीति ही चल रही है। दोनों ही पार्टियों ने नेताओं ने सिर्फ न्यूज चैनल, दौनिक अखबार, वाटसाप, स्टाग्राम, और फेसबुक में दिखावें के लिए आंदोलन धरना प्रदर्शन और अनेक रोलबाजी कर चुके है।
छत्तीसगढिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लोगों को काफी उम्मीदें थी। लेकिन करीब साढे चार साल बीत जाने के बाद भी इस क्षेत्र के बहुप्रतीक्षित मांग कोलियारी से लेकर दोनर बारना सड़कचौडीकरण की मांग पुरा नही हुआ। बल्कि रेत माफियाओं ने पुरे धमतरी जिलें में बाहर के गुंडे और क्षेत्रीय छुटभैया नेताओं के संरक्षण के कारण दबंगई से आतंक मचा रखे है जिससे अब लोग अतिशीघ्र छुटकारा पाना चाहते है। अब ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा की छत्तीसगढ़ में यैसा ही गुंडाराज, माफियाराज चलता रहेगा या फिर पहले जैसा शांत खुशहाल और धान का कटोरा कहलायेगा।
