छत्तीसगढ़

महाप्रभु के स्नान के साथ रथ यात्रा महोत्सव का शुभारंभ

धमतरी(प्रखर) धमतरी में रथ यात्रा का सभी को बेसब्री से इंतजार रहता है।शनिवार को महाप्रभु का विधि विधान से स्नान कराया गया। इसके साथ ही रथ यात्रा महोत्सव का शुभारंभ हो चुका है। 7 जुलाई को रथ यात्रा निकाली जाएगी। इसके लिए जगदीश मंदिर ट्रस्टी द्वारा घूम घूम कर लोगों को आमंत्रण कार्ड भी वितरण किया जा रहा है।
धमतरी में रथ यात्रा पर्व की परंपरा पिछले 106 सालों से चली आ रही है जो आज भी कायम है।महोत्सव का आरंभ 29 जून से हो गया है।शनिवार को विधि विधान से महाप्रभु का स्नान कराया गया। पंडित बालकृष्ण के द्वारा मंत्र उच्चारण के साथ उनके पुत्र गौरव शर्मा ने विधि विधान से स्नान कराया जिसमें समुद्र से लाया हुआ जल के साथ सभी सामग्री था। स्नान के बाद भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया। इसके साथ ही भगवान परंपरा अनुसार बीमार हो जाएंगे और फिर काढ़ा वितरण किया जाएगा। इस दौरान धमतरी श्री जगदीश मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष किरण कुमार गाँधी, उपाध्यक्ष सत्यनारायण राठी, प्रकाश गाँधी सचिव और मोहन अग्रवाल सह सचिव , ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष लखमशी भानुशाली, ट्रस्टी श्यामसुंदर अग्रवाल, डॉ.हीरा महावर, श्याम अग्रवाल, हर्षद मेहता, गोपालशर्मा, लक्ष्मीचंद बाहेती, किरण कुमार गांधी, अजय अग्रवाल , बिपिन पटेल , मदनमोहन खंडेलवाल, बिहारीलाल अग्रवाल,प्रकाश गांधी, रमेश लाट, भरत सोनी, बालकृष्ण महाराज, गोविंद शर्मा, अनिल मित्तल, प्रीतेश गांधी, दिलीप राज सोनी, राजेंद्र शर्मा, योगेश गांधी, मुन्ना शर्मा,कीर्ति शाह, सुबोध ठाकुर,तपन यादव आदि उपस्थित थे ।
ट्रस्ट के अध्यक्ष किरण गांधी ने बताया कि शनिवार को सुबह 10:30 बजे से महाप्रभु जगन्नाथ भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का महा स्नान कराया गया। 15 दिवसीय रथयात्रा महोत्सव का आरंभ हो गया स्नान के बाद महाप्रभु बीमार पड़ेंगे।इस बीच 2 जुलाई से 5 जुलाई तक रोजाना सुबह 7:30 बजे काढ़ा का वितरण किया जाएगा। 6 जुलाई को महाप्रभु की दोबारा प्राण प्रतिष्ठा होगी। इसके बाद 7 जुलाई को भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी।

चित्रकारी के लिए उड़ीसा से आ रहे हैं पीढ़ी दर पीढ़ी

स्नान के बाद प्रतिवर्ष भगवान को पुनः मूल स्वरूप में लाया जाता है। इसके लिए कालाहांडी उड़ीसा से एक ही परिवार के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी पहुंच रहे हैं। इस वक्त पहुंचे विक्रम ने बताया कि सबसे पहले उनके नाना देवी प्रसाद और उनके भाई आया करते थे। उसके बाद उनके पिता उसो लाल चित्रकार आए। अब वह 1993 से लगातार प्रतिवर्ष यहां पर आकर चित्रकारी कर रहे हैं। इसमें लगभग तीन दिन का समय लग जाता है।यह कच्चा रंग होता है जो प्रतिवर्ष पुनः लाया जाता है। स्नान के बाद भगवान को मूल स्वरूप में चित्रकारी के माध्यम से लाते हैं।

Author Desk

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button