छत्तीसगढ़

बस्तर की समृद्धि, संस्कृति, संसाधन और पर्यावरण को बचाने के लिए कांग्रेस की पदयात्रा : बैज

बस्तर की समृद्धि, संस्कृति, संसाधन और पर्यावरण को बचाने के लिए कांग्रेस की पदयात्रा : बैज

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में किरंदुल से दंतेवाड़ा तक की न्याय पदयात्रा की शुरुआत हुई। 4 दिनों की इस 40 किलोमीटर की पदयात्रा का समापन 29 मई 2025 को दंतेवाड़ा जिला कार्यालय के घेराव के साथ होगा। भारतीय जनता पार्टी के सरकार आने के बाद से छत्तीसगढ़ के संसाधनों को निजी हाथों में सौंपने का काम बहुत तेजी से चल रहा है। पूरा बस्तर पांचवी अनुसूची का क्षेत्र है जहां ग्रामसभाओ को विशेष अधिकार है, लेकिन भाजपा की सरकार का फोकस है केवल कमीशनखोरी के लालच में पूंजीपतियों के मुनाफे पर केंद्रित है, और इसी के चलते बस्तर की लौह अयस्क खदाने, बहुमूल्य कोरंडम की खदाने और बस्तर के संसाधनों को कॉरपोरेट को सौंपा जा रहा है, जिसके खिलाफ बस्तर के आदिवासियों में भयंकर आक्रोश व्याप्त है।

दीपक बैज ने कहा है कि सवा साल के भीतर ही भाजपा का असल एजेंडा उजागर हो चुका है। जैसे ही छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनी, हसदेव अरण्य और तमोर पिंगला क्षेत्र में लाखों की संख्या में पेड़ काट दिए गए। सीआईएल और एसईसीएल के खदानों में खनन का कार्य अडानी की कंपनी को दिया गया। हाल ही में बस्तर के बैलाडीला में चार बड़ी लौह अयस्क की खदानें निजी पूंजीपतियों को 50 साल की लिस्ट पर दिया गया है। बैलाडीला 1ए और बैलाडीला 1बी की लौह अयस्क की खदाने आर्सेलर मित्तल को, बैलाडीला 1सी की खदान रूंगटा समूह को और कांकेर के हाहालादी की खदानें सागर स्टोन को बिना ग्रामसभा के एनओसी के 50 साल के लिए लीज पर दे दिया गया है। कॉर्पोरेट परस्त नीतियों का विरोध करने वाले निर्दोष आदिवासियों को जांच एजेंसियों का डर दिखाकर डराया, धमकाया जा रहा है। पंचायतों पर अनुचित दबाव बनाकर मुंह बंद रखने मजबूर किया जा रहा है, जिसके चलते हजारों की संख्या में आदिवासी बस्तर से पलायन करने मजबूर है। कांग्रेस की यह पदयात्रा भाजपा सरकार के इन्हीं पूंजीवादी नीतियों के खिलाफ है।

बैज ने कहा कि भाजपा सरकार के संरक्षण में चंद कॉर्पोरेट की बूरी नजर बस्तर के संसाधनों पर है। हाल ही में स्टार बीजापुर के कोरंडम खदान से पहले सैकड़ो पेड़ों की चुपचाप कटाई कर दी गई। वन विभाग, पर्यावरण विभाग और खनिज विभाग से अब तक इस पर कोई जवाब नहीं आया है। सरकार में बैठे जवाबदार लोग अनभिज्ञ होने का दावा कर रहे हैं। सवाल यह है कि बस्तर के संसाधनों को लूटने का इस तरह का आदेश दे कौन रहा है?

Author Desk

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