कृदत्त कॉलोनी की महिलाओं ने छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में मनाया हरियाली तीज पर्व
लोकगीतों और पारंपरिक गीत-संगीत से सजा आयोजन, छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपरा की दिखी खूबसूरत झलक

कृदत्त कॉलोनी की महिलाओं ने छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में मनाया हरियाली तीज पर्व
लोकगीतों और पारंपरिक गीत-संगीत से सजा आयोजन, छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपरा की दिखी खूबसूरत झलक
धमतरी। शहर के गोकुलपुर स्थित कृदत्त कॉलोनी में महिलाओं ने हरियाली तीज पर्व को इस बार पारंपरिक छत्तीसगढ़ी रंग में मनाया। 15 अगस्त के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कॉलोनी की महिलाएं छत्तीसगढ़ी पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर शामिल हुईं। महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। आयोजन के दौरान पूरे कॉलोनी परिसर में उत्साह, उमंग और पारंपरिक संस्कृति का रंग देखने को मिला।
हरियाली तीज के अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक परिधान धारण कर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति को जीवंत किया। रंग-बिरंगे पारंपरिक वस्त्रों और श्रृंगार में सजी महिलाओं ने आयोजन में विशेष आकर्षण बिखेरा। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और मिल-जुलकर त्योहार की खुशियां साझा कीं।
लोकगीतों से गूंजा कॉलोनी परिसर
कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ी लोकगीतों एवं पारंपरिक गीत-संगीत की धूम रही। महिलाओं ने सामूहिक रूप से पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए और लोक संस्कृति से जुड़े गीतों पर उत्साह के साथ सहभागिता की। गीत-संगीत के बीच महिलाओं ने पर्व का आनंद उठाया और एक-दूसरे के साथ आत्मीयता से खुशियां बांटीं।
छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में सजी महिलाओं ने अपनी लोक परंपरा की खूबसूरत झलक प्रस्तुत करते हुए यह संदेश भी दिया कि आधुनिक दौर में भी अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजना बेहद जरूरी है। आयोजन में पारंपरिकता और आधुनिक सामाजिक मेल-जोल का सुंदर संगम देखने को मिला।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास
महिलाओं ने कहा कि हरियाली तीज जैसे पारंपरिक पर्व केवल धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये हमारी संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी जड़ों, लोक संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों से परिचित कराया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं, लोकगीतों और पारंपरिक वेशभूषा से भी जुड़ी हुई है। जब महिलाएं मिलकर ऐसे पर्व मनाती हैं तो इससे संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारा भी मजबूत होता है।
महिलाओं में दिखा उत्साह और उमंग
आयोजन के दौरान महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सभी ने मिलकर पर्व का आनंद लिया और एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं। महिलाओं ने कहा कि इस तरह के सामूहिक आयोजन से कॉलोनी की महिलाओं के बीच आपसी मेल-जोल बढ़ता है तथा एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जानने और साथ मिलकर सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलता है कार्यक्रम ने कॉलोनी के माहौल को उत्सवमय बना दिया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, पूजा-अर्चना और महिलाओं की सामूहिक सहभागिता ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया ये महिलाएं रहीं उपस्थित कार्यक्रम में दीक्षा साहू, रीना भोसले, धामेश्वरी साहू, कविता साहू, मनीषा साहू, वंदना सिंह, विजयलक्ष्मी सिंह, मोनिका साहू, भारती ठाकुर, एकता सिंह, शैल गंजीर, रानी डडसेना, ज्योति जायसवाल, देवश्री साहू सहित कॉलोनी की बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।
महिलाओं ने सामूहिक रूप से पारंपरिक पर्वों को इसी तरह उत्साह और सामाजिक एकजुटता के साथ मनाने का संकल्प लिया। आयोजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ी संस्कृति, महिला एकजुटता और पारंपरिक विरासत को सहेजने का सुंदर संदेश सामने आया।



