छत्तीसगढ़

सार्वजनिक जीवन में मर्यादाओं के विपरीत आचरण किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं – विजय मोटवानी


पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की टिप्पणी की तीखी भर्त्सना, सार्वजनिक माफी और संयम की उठी पुरज़ोर मांग
धमतरी – प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उपमुख्यमंत्री अरुण साव के संबंध में की गई आपत्तिजनक एवं स्तरहीन टिप्पणी को लेकर प्रदेशभर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस बयान से न केवल भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में आक्रोश व्याप्त है, बल्कि सामाजिक संगठनों और विशेषकर साहू समाज के लोगों की भावनाएं भी आहत हुई हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नगर निगम धमतरी के लोक निर्माण विभाग के सभापति विजय मोटवानी ने पूर्व मुख्यमंत्री के वक्तव्य को सार्वजनिक जीवन की मर्यादाओं के सर्वथा विपरीत बताया है।
विजय मोटवानी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में वैचारिक मतभेद और राजनीतिक आलोचना का अधिकार सभी को है, किंतु इसकी भी एक सीमा और शालीनता होती है। संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए भाषा और व्यवहार में संयम बरतना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि किसी उपमुख्यमंत्री जैसे गरिमामयी पद पर बैठे व्यक्ति की तुलना इस प्रकार करना न केवल अशोभनीय है, बल्कि यह राजनीतिक शुचिता, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी सीधा प्रहार है।
सभापति मोटवानी ने अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजनीति में प्रतिस्पर्धा हो सकती है, लेकिन व्यक्तिगत कटाक्ष और अपमानजनक उपमाएं देना किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे वक्तव्य समाज में नकारात्मकता फैलाते हैं और युवा पीढ़ी के सामने राजनीति की गलत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जैसे वरिष्ठ नेता से इस तरह की भाषा की अपेक्षा कतई नहीं की जाती।
उन्होंने आगे कहा कि भूपेश बघेल द्वारा दिया गया बयान निंदनीय, दुर्भाग्यपूर्ण एवं लोक मर्यादाओं के प्रतिकूल है। इस प्रकार के बयान से प्रदेश की राजनीतिक संस्कृति को नुकसान पहुंचता है। अतः उन्हें चाहिए कि वे सार्वजनिक रूप से अपने शब्दों के लिए माफी मांगें और भविष्य में इस तरह की टिप्पणी न करने का स्पष्ट आश्वासन दें। यही वर्तमान समय की सबसे बड़ी मांग है।
विजय मोटवानी ने यह भी चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार की बयानबाजी पर रोक नहीं लगी और माफी नहीं मांगी गई, तो भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता एवं समाज के लोग लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा स्वस्थ, सकारात्मक और मुद्दों पर आधारित राजनीति में विश्वास करती है, किंतु मर्यादा के उल्लंघन पर चुप नहीं बैठा जा सकता।
अंत में सभापति मोटवानी ने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत आक्षेपों में न बदलें, बल्कि जनहित, विकास और सामाजिक समरसता के मुद्दों पर सकारात्मक राजनीति करें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की गरिमा तभी बनी रह सकती है, जब सार्वजनिक जीवन में मर्यादा, संयम और सम्मान को सर्वोच्च स्थान दिया जाए।

Author Desk

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