आदिवासी जल, जंगल और जमीन के सच्चे संरक्षक हैं – कविता योगेश बाबर

मोखा में आदिवासी समाज का वार्षिक अधिवेशन गरिमामय वातावरण में संपन्न
धमतरी (प्रखर)ग्राम मोखा में आदिवासी ध्रुव गोंड समाज मुड़ा दरगहन परिक्षेत्र रीवागहन का वार्षिक अधिवेशन पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं सामाजिक एकता के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस अधिवेशन में परिक्षेत्र के आठ गांवों से समाज के महिला एवं पुरुष बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिससे आयोजन को व्यापक सामाजिक सहभागिता प्राप्त हुई।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य कविता योगेश बाबर रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता देवबती कोर्राम, सरपंच रीवागहन ने की। अधिवेशन की शुरुआत समाजजनों द्वारा निकाली गई भव्य कलश यात्रा से हुई, जिसका ग्रामवासियों ने पुष्पवर्षा एवं स्वागत के साथ अभिनंदन किया। तत्पश्चात सामाजिक भवन में कलश पूजन किया गया तथा भगवान शंकर के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया।
मंचीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कविता योगेश बाबर ने कहा कि आदिवासी समाज इस धरती पर बसने वाला सबसे प्राचीन समाज है, जो अनादि काल से अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के साथ सामंजस्य के लिए जाना जाता है। आदिवासी समाज ही जल, जंगल और जमीन का वास्तविक संरक्षक रहा है और आज भी प्रकृति संरक्षण में उसकी भूमिका अतुलनीय है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आदिवासी समाज उन्नति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। चाहे शिक्षा, राजनीति, प्रशासनिक व्यवस्था या सामाजिक क्षेत्र हो — हर क्षेत्र में समाज की सक्रिय सहभागिता बढ़ रही है। कोई भी समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब वह शिक्षा को अपनाकर कुरीतियों का त्याग करे। ऐसा करने पर समाज को प्रगति की राह पर बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।
उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी समाज अपनी एकजुटता, प्रतिबद्धता और ईमानदारी के लिए जाना जाता है, जो उसकी सबसे बड़ी ताकत है। समाज यदि इसी प्रकार संगठित रहकर आगे बढ़ता रहा तो निश्चित ही आने वाले समय में और भी नई ऊंचाइयों को छुएगा।
इस अवसर पर सुशीला सोरी, संजय ध्रुव, भागवत ठाकुर, हुलार कोर्राम, जैनी बाई ध्रुव, मन्नूराम ध्रुव, लीलाराम नेताम सहित परिक्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए समाज के गणमान्यजन एवं बड़ी संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर समाज की एकता, संस्कृति संरक्षण और विकास के संकल्प के साथ अधिवेशन का समापन किया गया।



