31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे के लिए सरकार संकल्पित : डिप्टी सीएम विजय शर्मा

31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे के लिए सरकार संकल्पित : डिप्टी सीएम विजय शर्मा
रायपुर। गृह एवं जेल मंत्री विजय शर्मा ने आज छत्तीसगढ़ संवाद नवा रायपुर में गृह एवं जेल विभाग के विकास कार्यों की जानकारी दी। प्रेस वार्ता में विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद के खात्मे के लिए सरकार संकल्पित है। 31 मार्च 2026 तक देशभर से नक्सलवाद खत्म होगा। नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता दो वर्षों में मिली है। उन्होंने आगे कहा कि अब तक 532 नक्सली न्यूट्रलाइज किए गए हैं। 2700 नक्सली पुनर्वास किए गए, 2 हजार गिरफ्तार हुए। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि पुनर्वास केंद्र में हम परिवार के सदस्यों को भी ला रहे हैं। अपने परिजनों के साथ लोग जेल में भी मिल रहे हैं। हम मानते हैं जंगल से पुनर्वास हो सकता है तो जेल से भी हो सकता है। आत्मसमर्पित नक्सल जोड़ों का विवाह भी कराया गया है। पुनर्वास के किट में मोबाइल भी शामिल है। मुख्य लक्ष्य नक्सलियों को दुनिया से जोडऩा है। पुनर्वास के बाद आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड भी बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा जनवरी 2024 से हमने कार्यों की शुरुआत की। नई सोच के साथ हमने कामकाज की शुरुआत की। सभी जिलों में 6 माह में ऑनलाइन सिस्टम लागू होगा। आईसीजीएस सिस्टम प्रयोग के तौर पर दो जिलों में लागू किए हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा ई साक्ष्य जैसे नए प्रयोगों से पुलिस का मनोबल बढ़ा है। ई साक्ष्य से कोई व्यक्ति अपने बयान से मुकर नहीं सकता। अपराध के प्रकार, व्यक्ति और स्थान के आधार पर सूचना एकत्र की जा सकती है। ऑनलाइन सिस्टम के आधार पर यह कार्य किया जा रहा है। कंप्लेन मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया गया है। अब शिकायतें ऑनलाइन वरिष्ठ अफसरों तक उपलब्ध होती है। इससे शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई शुरू हो जाती है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा धर्मांतरण के अपराध पहले 38 था दो साल में 67 दर्ज हुए हैं। सरकार ने गंभीरता से इस दिशा में काम किया। सरकार ने वैमनस्यता को कम करने का प्रयास किया। आतंकी गतिविधियों के विषय में भी कार्रवाई की गई है।
अवैध प्रवासियों के विषय में विजय शर्मा ने कहा की इसमें भी गंभीरता से कार्रवाई हुई है। हमारी सरकार ने स्पेशल टास्कफोर्स का गठन किया। टोल-फ्री नंबर के माध्यम से जानकारी ली गई। एफआईआर और कोर्ट की कार्रवाई तक होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं। कुछ मामलों में भारत छोडऩे का आदेश जारी किया गया। 34 लोगों को डिपोर्ट करने की कार्रवाई की गई है।



