धर्म- आध्यात्म करने और प्रवचन-सत्संग का कोई अर्थ नहीं, जब आपने उनके सार को अपने जीवन में नहीं उतारा : साध्वी शुभंकरा श्रीजी

रायपुर। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में शनिवार को साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि आप कितना भी पढ़ लो, लिख लो, ज्ञानी बन जाओ, प्रवचन सुन लो लेकिन जब तक इनके सार को आप अपने जीवन में नहीं उतारोगे तो इन सबका कोई मतलब नहीं होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आपने अपना कीमती समय बर्बाद कर दिया है, ऐसा माना जाएगा। आपने दुनिया भर के दर्शन पढ़े, अध्यात्म सीखा और आपके जीवन में कोई बदलाव नहीं आया तो यह सब करना आपके लिए व्यर्थ होगा।
साध्वीजी कहती है कि हमें जागृत होने के लिए यह जन्म मिला है, यह बहुत ही अच्छा अवसर है। सूर्योदय से पहले उठकर हमें सूर्योदय का स्वागत करना चाहिए। सुबह उठकर आपको स्फूर्ति और प्रसन्नता के साथ मुस्कुराना होगा और यदि आपने सुबह यह मुस्कान अपने चेहरे पर ले आया तो यह दिन भर के लिए आप के चेहरे में स्टोर हो जाएगी। हमारे शरीर स्वस्थ रहें, इसके लिए हम लोग सुबह उठकर मॉर्निंग वॉक, व्यायाम और प्रतिक्रमण करते हैं। आम भाषा में व्यायाम कह सकते है और जिनवाणी में हम इसे प्रतिक्रमण कहते हैं। वैसे आप जो भी करे, उद्देश्य तो आखिरकार स्वस्थ रहना ही होता है। वैसे ही एक बात और है कि जब तक आपका शरीर साथ दे रहा है तब तक खासकर महिलाओं को तो चौका नहीं छोड़ना चाहिए और पुरुषों को अपना बिजनेस नहीं छोड़ना चाहिए। हाथ पैर सही सलामत होते हुए आपको घर में सोए हुए नहीं पड़े रहना है। हम सभी को हम सभी को हर दिन 24 घंटे का समय मिलता है। चाहे वह मजदूर हो, बिजनेसमैन हो, घर गृहस्ती संभालने वाला व्यक्ति हो या फिर श्रावक श्राविका ही क्यों ना हो, सबको बराबर समय मिलता है। अब इन 24 घंटों में आपको क्या करना है, यह आप पर निर्भर करता है। आप किसी के हितैषी बन सकते हो परोपकार कर सकते हो, कोई अच्छा काम कर सकते हो।
परोपकार करो, उसे दर्शाओं मत
साध्वीजी कहती है कि आपने चीटियों को देखा होगा, वे दिन भर एक दूसरे के पीछे चलते ही रहते हैं लेकिन आज तक यह पता नहीं चला कि वे जाते कहां है और वह क्यों चलते रहते हैं। वैसे ही सभी जीव जैसे कि हाथी-घोड़े, सांप-बिच्छू, गाय-बैल यह सब दिन भर चलते ही रहते हैं पर कोई कर्म नहीं कर सकते क्योंकि कर्म सिर्फ आप कर सकते हो। अब आप दिन में कितना काम करते हो यह गिनोगे तो यह 50 से ज्यादा भी हो सकता है। अब इन 50 कामों में आपको यह देखना है कि इतने काम से कितने लोगों को फायदा हुआ है या ऐसे कौन से काम है जिन से किसी अन्य को फायदा हुआ हो। आपको परोपकार तो करना है पर यह किसी को बताना नहीं है कि आपने आज किसका भला कर दिया। अब आप खुद का ही उदाहरण ले लीजिए आप दिन में कोई ना कोई एक ऐसा काम जरूर करते होगे जिसमें पूरे परिजनों का एक काम हो जाता होगा। जैसे कि आपने सबके कपड़े धो दिए और उसे छत पर जाकर सुखा दिया। कपड़े सूख गए और आपने उन्हें उठाकर ले भी आया, यह काम तो आपने कर दिया लेकिन अगर आपने कहीं गलती से भी इसका बखान कर दिया तो सब बर्बाद हो गया समझो। आपको कर्म करके दर्शाना नहीं है।