छत्तीसगढ़

सरस्वती शिशु मंदिर मड़ाईभाठा के प्रवेशोत्सव में शामिल हुए पं. राजेश शर्मा

नवप्रवेशी विद्यार्थियों का किया आत्मीय स्वागत, कहा – संस्कारवान शिक्षा ही सशक्त राष्ट्र निर्माण की आधारशिला

सरस्वती शिशु मंदिर मड़ाईभाठा के प्रवेशोत्सव में शामिल हुए पं. राजेश शर्मा

नवप्रवेशी विद्यार्थियों का किया आत्मीय स्वागत, कहा – संस्कारवान शिक्षा ही सशक्त राष्ट्र निर्माण की आधारशिला

धमतरी- सरस्वती शिशु मंदिर, मड़ाईभाठा में आयोजित प्रवेशोत्सव कार्यक्रम अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमा एवं भारतीय संस्कृति के अनुरूप धार्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति स्थायी आमंत्रित सदस्य पं. राजेश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विद्यालय परिवार द्वारा उनका आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवेशी भैया-बहनों का तिलक लगाकर, पुष्प भेंट कर एवं मंगलकामनाओं के साथ स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। विद्यालय परिसर में नवप्रवेशी विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों के उत्साह से सकारात्मक एवं संस्कारमय वातावरण निर्मित हुआ। प्रवेशोत्सव के माध्यम से विद्यालय परिवार ने नए विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें विद्यालय की शिक्षण परंपरा, अनुशासन एवं संस्कारों से परिचित कराया।

मुख्य अतिथि पं. राजेश शर्मा ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्रवान, राष्ट्रभक्त, अनुशासित एवं संस्कारवान नागरिक तैयार करना है। भारतीय संस्कृति में शिक्षा को सदैव राष्ट्र निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम माना गया है। यदि विद्यार्थी विद्या के साथ संस्कार, अनुशासन, सेवा और नैतिक मूल्यों को भी अपने जीवन में अपनाते हैं, तो वे स्वयं के साथ समाज और राष्ट्र का भी उज्ज्वल भविष्य निर्माण करते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी शिक्षा जितनी आवश्यक है, उतना ही आवश्यक बच्चों में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, परिवार के प्रति सम्मान तथा सामाजिक जिम्मेदारियों का विकास करना भी है। सरस्वती शिशु मंदिर जैसे विद्यालय वर्षों से इसी उद्देश्य के साथ राष्ट्रभक्ति एवं भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रदान कर समाज को योग्य एवं संस्कारित नागरिक देने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे शिक्षण संस्थानों की भूमिका भविष्य के भारत के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पं. राजेश शर्मा ने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों को केवल अच्छी शिक्षा ही नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार, अनुशासन, सेवा भावना, बड़ों का सम्मान एवं राष्ट्रप्रेम की शिक्षा भी दें। उन्होंने कहा कि घर और विद्यालय दोनों मिलकर बच्चों के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। जब परिवार और विद्यालय एक समान उद्देश्य के साथ कार्य करते हैं, तभी समाज को श्रेष्ठ नागरिक प्राप्त होते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए नियमित अध्ययन, अनुशासन, समय का सदुपयोग, गुरुजनों का सम्मान एवं माता-पिता की सेवा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। शिक्षा के साथ-साथ खेल, योग, नैतिक शिक्षा और सामाजिक सहभागिता भी व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक हैं।

कार्यक्रम में महेंद्र पंडित, जितेंद्र यदु, अमन राव, जितेंद्र साहू, परमेश्वर साहू, ओमप्रकाश साहू सहित विद्यालय परिवार, आचार्यगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने मुख्य अतिथि पं. राजेश शर्मा का स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया तथा आभार व्यक्त किया। प्रवेशोत्सव के दौरान पूरे विद्यालय परिसर में उत्साह, उल्लास और भारतीय संस्कारों की सुंदर झलक देखने को मिली।

पं. राजेश शर्मा ने कहा कि “संस्कारवान पीढ़ी ही विकसित, आत्मनिर्भर, समृद्ध और विश्वगुरु भारत की सबसे मजबूत नींव है। शिक्षा तभी सार्थक है जब वह व्यक्ति को ज्ञान के साथ चरित्र, संस्कार, सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से भी समृद्ध बनाए।”

Author Desk

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