छत्तीसगढ़

रसोई की मिठास पर महंगाई की मार, 15 दिन में चीनी 17 रुपए महंगी, 67 से 70 रुपए किलो तक पहुंचा भाव

नई दिल्ली/रायपुर (प्रखर)। कभी घर की रसोई में रोजमर्रा की जरूरत का मामूली सामान मानी जाने वाली चीनी अब लोगों के घरेलू बजट पर भारी पडऩे लगी है। पिछले करीब 15 दिनों में चीनी के दाम में लगभग 17 रुपए प्रति किलो का उछाल आया है। बाजार में चीनी अब अलग-अलग इलाकों में 65 से 67 और 70 रुपए किलो तक बिक रही है। अचानक बढ़ी कीमतों का असर सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। चीनी की कीमतों में आई तेजी का असर केवल घरों की रसोई तक सीमित नहीं है। मिठाई दुकानदारों, हलवाइयों, बेकरी संचालकों और चाय दुकानों का खर्च भी बढ़ गया है। कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में त्योहारों का सीजन शुरू होने के साथ चीनी की मांग में और तेजी आ सकती है। ऐसे में यदि कीमतों पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ तो आम लोगों को त्योहारी सीजन में महंगी मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों का सामना करना पड़ सकता है।

15 दिन में 48 से सीधे 67-70 रुपए किलो पहुंची चीनी

रिटेल कारोबारियों के मुताबिक, करीब 15 दिन पहले चीनी का भाव 48 रुपए किलो के आसपास था। अब यही चीनी बढक़र 65 से 67-70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। यानी बेहद कम समय में उपभोक्ताओं को प्रति किलो करीब 17 से 19 रुपए ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं। इसी तरह गुड़ की कीमत में भी तेज उछाल आया है।

मिठाई बनाने का पूरा गणित बिगड़ा

चीनी और गुड़ महंगे होने के साथ मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाले अन्य सामान की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। कारोबारियों के अनुसार, करीब एक महीने पहले 900 रुपए किलो मिलने वाला बादाम अब लगभग 1,100 रुपए किलो तक पहुंच गया है। इसका सीधा असर मिठाई की लागत पर पड़ रहा है। त्योहारों से पहले कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने मिठाई कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। कारोबारियों के सामने लागत बढऩे के बावजूद ग्राहकों पर कितना बोझ डाला जाए, यह भी बड़ी चुनौती बन गई है।

एथेनॉल की बढ़ती मांग को माना जा रहा बड़ी वजह

कारोबारियों के मुताबिक चीनी के दाम बढऩे की प्रमुख वजहों में एथेनॉल उत्पादन भी शामिल है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की मांग बढऩे के साथ गन्ने के रस और सीरप का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में बड़े स्तर पर किया जा रहा है। इसका असर चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा पर पड़ रहा है। चीनी मिलों में गन्ने की उपलब्धता प्रभावित होने से चीनी उत्पादन पर भी दबाव बढ़ा है। कारोबारियों का कहना है कि गन्ने से चीनी और एथेनॉल बनाने के बीच संतुलन बिगडऩे का असर अब सीधे बाजार में दिखाई देने लगा है।

त्योहारों से पहले और बढ़ सकती है कीमत

त्योहारी सीजन में चीनी की खपत बढऩे की उम्मीद है। मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढऩे के साथ चीनी की जरूरत भी बढ़ेगी। कारोबारियों को आशंका है कि यदि आपूर्ति और कीमतों के बीच संतुलन नहीं बना तो आने वाले दिनों में चीनी के दाम और ऊपर जा सकते हैं। ऐसे में त्योहारों से पहले चीनी और गुड़ की कीमतों में आई तेजी ने आम परिवारों के साथ-साथ मिठाई और खाद्य कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। रसोई की जरूरत की चीनी अब बजट का बड़ा हिस्सा खींच रही है और मिठास पर महंगाई की यह मार त्योहारी सीजन में और तीखी पडऩे की आशंका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार देश में चीनी के दाम पिछले तीन महीनों में करीब 40 प्रतिशत यानी 19 रुपए प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। इसी अवधि में गुड़ की कीमत में 24 प्रतिशत, चावल में 16 प्रतिशत और मक्के के आटे में 11 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं रायपुर में गुरुवार को चीनी के खुदरा भाव में एक ही दिन में 6 रुपए प्रति किलो का उछाल आया। सुबह जहां शक्कर 64 रुपए किलो बिक रही थी, वहीं शाम तक इसका भाव बढक़र 70 रुपए किलो पहुंच गया। थोक बाजार में भी कीमत 62 रुपए से बढक़र 67 रुपए किलो हो गई।

पिछले कुछ वर्षों में इन खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी हुई थी, लेकिन हाल के दिनों में अचानक तेजी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने गुरुवार को टैरिफ रेट कोटा के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा, हर महीने 10 टन से अधिक चीनी की खपत करने वाले थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट भी लागू की गई है। ऐसे उपभोक्ता अब अपनी 15 दिनों की खपत के बराबर ही चीनी का स्टॉक रख सकेंगे।

ओपनिंग स्टॉक कम रहने की आशंका

चीनी की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह आगामी 2026-27 सीजन, जो 1 अक्टूबर से शुरू होगा, में शुरुआती स्टॉक कम रहने का अनुमान है। जानकारों के मुताबिक घरेलू खपत के लिए जरूरी करीब 50 लाख टन के मुकाबले ओपनिंग स्टॉक कम रहने की आशंका है। इससे आने वाले दिनों में आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

एथेनॉल उत्पादन का भी असर

चीनी बाजार में तेजी के पीछे एथेनॉल उत्पादन को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। मौजूदा मानकों के अनुसार एथेनॉल उत्पादन में करीब 67 प्रतिशत मक्का, चावल की टुकड़ी और खराब अनाज, जबकि करीब 33 प्रतिशत गन्ने और उसके उत्पादों का इस्तेमाल होता है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के अनुसार, देश में पिछले साल करीब 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। एथेनॉल की बढ़ती मांग और चीनी उत्पादन के बीच संतुलन का असर अब बाजार की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

Author Desk

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