अपने अधिकारों को लेने के लिए महिलाओं का जागृत होना जरूरी है- डॉ यशोदा साहू

धमतरी (प्रखर) प्रतिवर्ष 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है 8 मार्च को विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान प्रशंसा और प्रेम प्रकट करते हुए महिलाओं की आर्थिक राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियां एवं कठिनाइयों की सापेक्षता की उपलक्ष में उत्सव के रूप में मनाया जाता है l नारी के अनेक नाम है उसे महिला ,नारी मां पत्नी बेटी, बहू नाम से भी जाना जाता है l समय के साथ महिला को अलग-अलग भूमिका का निर्वहन करना पड़ता है l पंडित जवाहरलाल नेहरू जी ने एक वाक्य कहा था “लोगों को जगाने के लिए महिलाओं का जागृत होना जरूरी हैl” एक बार जब वह अपना कदम उठा लेती है परिवार आगे बढ़ता है, गांव आगे बढ़ता है, और राष्ट् विकास की ओर उन्मुख होता है l प्राचीन काल से ही परिवार समाज ,देश में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है वैदिक काल में अनेक विदुषी महिलाएं थीं जिन्होंने अपनी विद्वता का परिचय दिया थाl जैसे गार्गी, मैत्रीय , निवावरी परंतु आज की समय में नारी को अबला असहाय कहा जाता है और उसके सशक्तिकरण का प्रयास उसके लिए सशक्तिकरण का प्रयास किया जा रहा हैl मेरे विचार से नारी अबला कभी नहीं रही है बस एक महिला को परिवार, समाज की राक्षसी विचार की भोगी बनना पड़ा है जैसे दहेज प्रथा , अशिक्षा, यौन हिंसा ,असमानता ,भ्रूण हत्या, महिलाओं की प्रति घरेलू हिंसा ,वेश्यावृत्ति ,मानव तस्करी ,बलात्कार, और ऐसे ही दूसरे विषय l लैंगिक भेदभाव राष्ट्र में सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक अंतर ले आता है जो देश को पीछे की ओर ले जाता है l महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महिला को स्वयं प्रयास करना होगा और इसकी शुरुआत परिवार से ही होती है l और एक नारी को सशक्त बनाने में सबसे पहले उनके माता-पिता( परिवार) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है माता-पिता को चाहिए कि वह बेटा और बेटी दोनों का पालन पोषण एक समान करें, दोनों को समान शिक्षा दे ,परिवार में एक धारणा है बेटी को लेकर कि उसे विवाह करके पराया घर जाना है lइसलिए उसे पढ़ा लिखा कर क्या लाभ होगा l माता-पिता को इस विचार को बदलना होगा क्योंकि अगर नारी शिक्षित होती है तो दो परिवार शिक्षित होता है lएक नारी के सशक्त होने की शुरुआत उसके परिवार से ही होती है lपरिवार में माता-पिता का कर्तव्य है कि वह बेटा और बेटी में अंतर न करें lदोनों को समान शिक्षा दे ,उनका मनोबल बढ़ाया उनको आगे बढ़ने का अवसर दे एक लड़की की क्षमता को पहचाने और उन्हें उसे दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करें एवं सहयोग करें नारी का जीवन कष्ट /संघर्ष पूर्ण होता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए विभिन्न प्रकार की चुनौती का सामना करना पड़ता है l परिवार में रूढ़िवादी विचारों का सामना करना पड़ता है, जैसे उन्हें घर का काम करना है,ज्यादा पढ़ना लिखना नहीं है, उम्र होते ही विवाह करना है संतान की उत्पत्ति करना है ,परिवार की सेवा करना है ,बस एक महिला को घर की चार दिवारी तक ही सीमित कर दिया जाता है ,और अनेक बार उन्हें शोषण का शिकार होना पड़ता हैl मेरे विचार से नारी का जीवन यही तक सीमित नहीं है lजब परमात्मा ने नारी को जगत जननी का दर्जा दिया है तो परिवार समाज में उनका महत्व इतना कम कैसे हो सकता है lनारी को सशक्त होना है तो उसे स्वयं के लिए जागरूक होना पड़ेगा l सशक्तिकरण से तात्पर्य होता है अपनी क्षमता को पहचानना अगर नारी ने अपनी क्षमता को पहचान लिया तो उसे आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता है l बस उसे स्वयं के लिए प्रयास करना पड़ेगा l नारी को संकल्प लेना पड़ेगा कि उसे जीवन की किसी भी पड़ाव में शोषण का शिकार नहीं होना है lनारी को आत्मनिर्भर बनना होगा और आत्मनिर्भर बनने के लिए उसे सबसे ज्यादा सहायता शिक्षा सहयोग करेगी l हर नारी को शिक्षित होना पड़ेगा शिक्षा अज्ञानता से ज्ञान की प्रकाश की ओर ले जाती है l शिक्षित नारी ही आवाज उठा सकती है l भारत के संविधान में उल्लिखित समानता के अधिकार के प्रति जागरूक हो सकती है lलैंगिक समानता को प्राथमिकता देने से पूरे भारत में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है महिला सशक्तिकरण से तात्पर्य है एक महिला का शारीरिक मानसिक और सामाजिक रूप से मजबूत होना सभी क्षेत्रों में महिलाओं का उत्थान राष्ट्र की प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए l महिलाओं का जन्म सिद्ध अधिकार है कि उन्हें समाज में बराबर का महत्व मिले अगर वास्तव में सशक्तिकरण लाना है तो महिलाओं को अपने अधिकारों से अवगत होना होगा l न केवल परिवार घरेलू, जिम्मेदारियां बल्कि उन्हें हर क्षेत्र में सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभानी होगी lउन्हें समाज देश में घटित होने वाली घटनाओं को जानना होगा l अगर एक महिला सशक्त होती है तो अपने स्वास्थ्य, शिक्षा ,नौकरी तथा परिवार , देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी को लेकर ज्यादा सचेत रहती है l हर क्षेत्र में भाग लेती है एवं रुचि प्रदर्शित करती है l अपने जीवन से जुड़े हर फैसले स्वयं लेती है lअंत में मेरा विचार है कि सशक्तिकरण लाने के लिए महिलाओं को सक्षम बनना होगा ,शिक्षित होना होगा ,अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा और परिवार ,समाज, देश में स्वयं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठित करना होगा l
“नारी तू अबला नहीं
है तू शक्ति का केंद्र”
डॉक्टर यशोदा साहू (सहायक प्राध्यापक इतिहास) यशवंत राव मेघा वाले शासकीय महाविद्यालय मगरलोड जिला धमतरी



