मनरेगा बचाओ संग्राम : गांधी मैदान में कांग्रेस का ऐतिहासिक उपवास सत्याग्रह, भाजपा सरकार पर ग्रामीण भारत की रीढ़ तोड़ने का आरोप

मनरेगा गरीबों के लिए योजना नहीं, संविधान प्रदत्त अधिकार है – तारिणी चंद्राकर
धमतरी(प्रखर)महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में किए जा रहे कथित बदलावों के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने गांधी मैदान, धमतरी में उपवास सत्याग्रह कर व्यापक जनविरोध दर्ज कराया। “मनरेगा बचाओ संग्राम” के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक, जनप्रतिनिधि, महिला, युवा एवं छात्र संगठनों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
राजीव भवन में प्रेसवार्ता के बाद कांग्रेस का यह आंदोलन सड़कों तक पहुंचा। गांधी मैदान में आयोजित धरने के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर मनरेगा के नाम, नियम और अधिकारों से छेड़छाड़ का विरोध किया तथा भाजपा सरकार पर गरीब, मजदूर और किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया।
भाजपा सरकार जनविरोधी और तानाशाही रवैये पर उतरी : कांग्रेस
धरने को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार संवैधानिक अधिकारों को योजनाओं में बदलकर कमजोर करने की नीति पर चल रही है। मनरेगा जैसे कानून, जिसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को जीवन और सम्मान दिया, उसे नाम बदलने और नियमों में बदलाव के माध्यम से निष्प्रभावी करने का प्रयास किया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी एक योजना की नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के अस्तित्व, श्रमिकों के अधिकार और सामाजिक न्याय की रक्षा की लड़ाई है।
मनरेगा रोजगार ही नहीं, सम्मान और सुरक्षा की गारंटी : तारिणी चंद्राकर
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने कहा कि मनरेगा कोई साधारण सरकारी योजना नहीं, बल्कि संविधान की भावना से जुड़ा एक अधिकार आधारित कानून है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ने पहली बार ग्रामीण भारत को यह कानूनी अधिकार दिया कि वह सरकार से काम मांग सके।
उन्होंने बताया कि कानून के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिन का रोजगार देने की बाध्यता है। यदि 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता तो बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य है। यही वह वैधानिक गारंटी है, जिसे कमजोर किया जा रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है मनरेगा : अम्बिका मरकाम
सिहावा विधायक अम्बिका मरकाम ने कहा कि मनरेगा वर्षों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है।
यह योजना प्रतिवर्ष 5 से 6 करोड़ परिवारों को रोजगार देती है, गांवों से शहरों की ओर मजबूरी में होने वाले पलायन को रोकती है, कृषि मजदूरी दर को स्थिर करती है और गांवों में तालाब, सड़क, जल संरक्षण जैसी टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करती है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा ने महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता दी है। कुल कार्यदिवसों में लगभग 60 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की रही है, जो इस योजना की सामाजिक सफलता को दर्शाता है।
VB-GRAM-G अधिनियम मजदूरों पर सीधा हमला : लक्ष्मी ध्रुव, लेखराम साहू
पूर्व विधायक लक्ष्मी ध्रुव एवं लेखराम साहू ने कहा कि प्रस्तावित VB-GRAM-G अधिनियम मनरेगा की आत्मा को समाप्त कर देता है।
उन्होंने कहा कि—
यह रोजगार की वैधानिक गारंटी खत्म करता है
निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण केंद्र सरकार के हाथों में करता है
ग्राम सभा और पंचायतों को कमजोर करता है
केंद्र का मजदूरी अंशदान 90% से घटाकर 60% करता है
इससे राज्यों और सीधे मजदूरों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा, रोजगार के अवसर घटेंगे और ग्रामीण संकट और गहरा जाएगा।
गांधी जी का नाम हटाना ग्राम स्वराज पर चोट : मोहन लालवानी, शरद लोहाना
पूर्व जिला अध्यक्ष मोहन लालवानी एवं शरद लोहाना ने कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज की अवधारणा पर सीधा हमला है।
उन्होंने कहा कि गांधीजी के विचारों पर आधारित योजना से उनका नाम हटाना गरीबों के सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है।
देशव्यापी आंदोलन जारी रहेगा : पंकज महावर, आनंद पवार
प्रदेश संयुक्त महामंत्री पंकज महावर और पूर्व पीसीसी सचिव आनंद पवार ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर मनरेगा बचाओ संग्राम को देशव्यापी जनआंदोलन का रूप दिया गया है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस तब तक चुप नहीं बैठेगी जब तक मनरेगा को उसके मूल अधिकार आधारित स्वरूप में बहाल नहीं किया जाता।जनसैलाब बना गांधी मैदानउपवास सत्याग्रह में जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर, पूर्व विधायक लक्ष्मी ध्रुव, लेखराम साहू, पंकज महावर, मोहन लालवानी, शरद लोहाना, राजकुमारी दीवान, आनंद पवार, सूर्यप्रभा चेटयार, दीपक सोनकर, विशु देवांगन, अंबिका सिन्हा, नरेन्द्र सोनवानी, राजा देवांगन सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता और ग्रामीण नागरिक मौजूद रहे।



