छत्तीसगढ़

दुष्कर्म के बाद हत्या के दोषी को हाई कोर्ट से रहत, मृत्य दंड की सजा उम्र कैद में तब्दील

हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या के इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर नहीं माना

बिलासपुर। महिला को बहलाकर जंगल ले जाकर दुष्कर्म के बाद हत्या के दोषी की मृत्युदंड की सजा को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा में तब्दील कर दिया. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बड़ी सजा सिर्फ रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामलों में ही दी जा सकती है। जहां यह सख़्त लिमिट पूरी नहीं होती, वहां मौत की सजा को उम्रकैद में बदलना जरूरी है। इसके साथ यह भी निर्देश दिया कि ऐसी उम्रकैद दोषी की पूरी जिंदगी तक जारी रहेगी। मामले में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने यह फैसला सुनाया है।

बता दें कि बेमेतरा परिवार न्यायालय में भृत्य के पद में कार्यरत 25 वर्षीय महिला 9 अगस्त 2022 को छुट्टी पर अपने गांव खैरमुड़ा आई थी। 14 अगस्त 2022 को सुबह करीब 9 बजे, वह अपनी स्कूटी से अपने घर से निकली और अपने परिवार वालों को बताया कि वह बेमेतरा जा रही है। वह अपनी मंजि़ल तक नहीं पहुंची और उसका पता नहीं चला। उसके परिवार वालों की कोशिशों और रिश्तेदारों और गांव वालों से पूछताछ के बावजूद पीडि़ता का कोई पता नहीं चल सका।

15 अगस्त 2022 को उसके पिता ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस स्टेशन डभरा में गुमशुदा तौर पर रजिस्टर किया। पूछताछ के दौरान आरोपी पर शक हुआ, जो पीडि़त को जानता था। पीडि़त के पिता और मृतक की छोटी बहन के बयानों से पता चला कि आरोपी मोबाइल फोन पर पीडि़त के साथ रेगुलर संपर्क में था। इस आधार पर, कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की गई। सीसीटीवी फुटेज समेत इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर, जो एविडेंस एक्ट के सेक्शन के तहत सर्टिफिकेट से सपोर्टेड थे।

साक्ष्य एकत्र करने के बाद पुलिस ने आरोपी शंकर निषाद निवासी गाँव सुखदा, पुलिस स्टेशन डभरा, जिला सक्ति को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह मृतका से संपर्क में रहा। घटना दिनांक को उसने फोन कर उसे बुलाया एवं बरसात के कारण रास्ता बंद होने की बात कही और नया रास्ता बताने की बात कहते हुए उसे खरसिया स्टेशन लेकर गया, जहां अपनी मोटर साइकिल रेलवे स्टेशन के पार्किग में पार्क कर मृतका की एक्टिवा में पालगड़ घाटी ले गया।

यहां स्कार्फ में उसके हाथ बांध कर पहले दुष्कर्म किया, उसके बाद ब्लेड से हाथ व गले की नस काटकर हत्या की। पुलिस ने उसके मेमोरडंम पर जंगल से शव बरामद किया एवं पीएम कराया। इस मामले में जांजगीर एफटीसी कोर्ट ने आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई। सजा की पुष्टि के लिए शासन ने हाई कोर्ट में प्रकरण प्रस्तुत किया। वहीं आरोपी ने भी हाई कोर्ट में अपील की थी।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा कि आरोपी को दी गई मौत की सजा रेयरेस्ट ऑफ रेयर सिद्धांत की ज़रूरतों को पूरा नहीं करती है, इसलिए कानून में टिकने लायक नहीं है। इसे आरोपी की बाकी जिंदगी के लिए उम्रकैद में बदला जाता है।

Author Desk

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