आराध्य गरबा में गूंजे महाकाल के जयकारे, भक्ति में सराबोर हुआ पूरा मैदान
आज सप्तमी की संध्या सजेगा श्रीकृष्ण का दिव्य दरबार, कृष्णलीला और फूलों की होली होंगे विशेष आकर्षण

आराध्य गरबा में गूंजे महाकाल के जयकारे, भक्ति में सराबोर हुआ पूरा मैदान
‘मेरे महाकाल सरकार’ और ‘तकदीर मुझे ले चल महाकाल की बस्ती’ जैसे भक्ति गीतों पर देर रात तक झूमे गरबा प्रेमी
आज सप्तमी की संध्या सजेगा श्रीकृष्ण का दिव्य दरबार, कृष्णलीला और फूलों की होली होंगे विशेष आकर्षण
धमतरी। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित आराध्य गरबा 2026 में भक्ति, संस्कृति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। महाकाल थीम पर आयोजित विशेष संध्या में भगवान शिव की आराधना और गरबा की उमंग ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। हजारों की संख्या में गरबा प्रेमी काले रंग के परिधानों में शामिल हुए और ‘मेरे महाकाल सरकार’ तथा ‘तकदीर मुझे ले चल महाकाल की बस्ती’ जैसे भक्ति गीतों पर देर रात तक गरबा कर महादेव की भक्ति में सराबोर रहे।
धर्मप्रेमी समाजसेवी एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य पंडित राजेश शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव में प्रतिदिन अलग-अलग थीम के माध्यम से धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। आराध्य गरबा अब केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि धमतरी के परिवारों को एक साथ जोड़ने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने का माध्यम बनता जा रहा है।
हर बेटी में मां दुर्गा का स्वरूप, मातृशक्ति की आराधना मेरा सौभाग्य : पंडित राजेश शर्मा

आराध्य गरबा के आयोजक पंडित राजेश शर्मा ने आयोजन के पीछे की भावना व्यक्त करते हुए कहा कि जब वे अपनी बेटियों, बहनों और माताओं को मां दुर्गा की आराधना करते हुए गरबा खेलते देखते हैं, तो उन्हें आत्मिक आनंद और अपार प्रसन्नता का अनुभव होता है। उनके लिए यह आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि मां के चरणों में श्रद्धा अर्पित करने और धमतरी के परिवारों के प्रति अपनेपन का भाव व्यक्त करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि गरबा परिसर में पहुंचने वाले बच्चों, बेटियों, बहनों और उनके परिवारों के चेहरों पर खिलती मुस्कान उनके लिए सबसे बड़ी पूंजी है। लोगों की खुशियों के लिए काम करना उनके लिए केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि धर्म और सेवा का मार्ग है।
‘असली रंग अभी बाकी’, हर परिवार तक पहुंचेंगी गरबा की खुशियां

आराध्य गरबा 2026 में बढ़ते उत्साह के बीच पंडित राजेश शर्मा का कहना है कि आयोजन की भव्यता और बढ़ाने का उत्साह तो है ही, लेकिन उनका सबसे बड़ा संकल्प धमतरी के प्रत्येक परिवार तक उत्सव की खुशियां पहुंचाना है। इसी भावना के साथ उन्होंने कहा, ‘असली रंग अभी बाकी है।’
पंडित राजेश शर्मा ने बताया कि पांच वर्ष पहले जब आराध्य गरबा की शुरुआत की गई थी, तब मन में एक ही विचार था कि धमतरी के लोगों को ऐसा आयोजन मिले, जहां वे अपने परिवार के साथ आकर गरबा खेल सकें, मां की आराधना कर सकें और उत्सव की खुशियों का आनंद उठा सकें। समय के साथ यह आयोजन भव्य स्वरूप लेता गया, लेकिन इसके पीछे की मूल भावना आज भी वही है—हर परिवार को अपनत्व और उत्सव से जोड़ना।
महंगे टिकटों की बाधा से परे, हर परिवार को मिले भव्य आयोजन का आनंद
पंडित राजेश शर्मा ने कहा कि बड़े शहरों में आकर्षक लाइटिंग, आधुनिक संगीत व्यवस्था, विशेष गरबा इफेक्ट्स और सेलिब्रिटी की मौजूदगी वाले आयोजनों की अपनी अलग पहचान है। हालांकि, कई बार महंगे टिकटों के कारण आम परिवारों के लिए इनमें शामिल होना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार के दो बच्चे या चार भाई-बहन गरबा खेलने के इच्छुक हों, तो सभी के लिए महंगे टिकट खरीदना आसान नहीं होता। ऐसे में बच्चों को अपनी इच्छा और उत्सव की खुशियों से दूर रहना पड़ सकता है।
आराध्य गरबा की परिकल्पना इसी सोच के साथ की गई है कि धमतरी के हर वर्ग के परिवारों को बड़े शहरों की तर्ज पर भव्य सजावट, आकर्षक गरबा इफेक्ट्स और शानदार वातावरण मिले। आर्थिक स्थिति किसी की खुशियों के आड़े न आए और बच्चे अपने परिवार के साथ उत्सव में भाग लेकर यादगार पल संजो सकें, यही आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि आराध्य गरबा में आने वाले परिवारों का उत्साह, बच्चों की मुस्कान और युवाओं की उमंग ही आयोजन की वास्तविक सफलता है। किसी आयोजन की सार्थकता केवल उसकी भव्यता या भीड़ से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि वह कितने लोगों के जीवन में खुशी और कितने परिवारों के मन में अपनेपन का भाव पैदा करता है।
धर्म, शिक्षा, खेल, साहित्य और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सेवा का संकल्प

पंडित राजेश शर्मा ने कहा कि समाजसेवा की उनकी सोच केवल आराध्य गरबा तक सीमित नहीं है। भगवान श्रीराम, धमतरी की अधिष्ठात्री देवी मां बिलाई माता और गुरुदेव शंकराचार्य महाभाग के आशीर्वाद से उन्हें धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से जनसेवा का अवसर मिलता रहा है।
रामकथा, श्रीमद्भागवत कथा, शिवकथा और धर्मसभाओं के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना तथा धार्मिक मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता रहा है। वहीं, युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए खेल पखवाड़े जैसे आयोजन किए गए हैं।
धमतरी की साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से कवि सम्मेलनों का आयोजन भी किया जाता रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग तथा पुस्तक-कॉपी की व्यवस्था और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योग एवं स्वास्थ्य संबंधी आयोजनों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है।
इन सभी गतिविधियों के पीछे उनकी मूल भावना समाज के प्रत्येक वर्ग की सेवा करना और धर्म के साथ शिक्षा, खेल, साहित्य तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सकारात्मक वातावरण तैयार करना है।
आज सजेगा श्रीकृष्ण का दिव्य दरबार, कृष्णलीला और फूलों की होली होगी खास
आराध्य गरबा 2026 में आज सप्तमी की संध्या पर श्रीकृष्ण थीम के साथ भक्ति और उल्लास का नया रंग देखने को मिलेगा। इस अवसर पर गरबा परिसर को नीली रंग थीम में सजाया जाएगा। नीले रंग के परिधानों में सजे गरबा प्रेमी राधा-कृष्ण की भक्ति के बीच गरबा करेंगे।
श्रीकृष्ण की मनमोहक लीलाएं और फूलों की होली आज की संध्या के प्रमुख आकर्षण रहेंगे। राधा-कृष्ण के प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक संदेश से सजी यह शाम गरबा प्रेमियों के लिए विशेष अनुभव लेकर आएगी।
आयोजक पंडित राजेश शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव में प्रतिदिन बदलती थीम और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां लोगों के उत्साह को नई ऊंचाइयां दे रही हैं।
भव्यता के साथ अपनत्व का संगम बना आराध्य गरबा

आराध्य गरबा 2026 में उमड़ रहा उत्साह इस बात का संकेत है कि धार्मिक आस्था और सामाजिक सरोकार जब एक साथ जुड़ते हैं, तो कोई आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम बन जाता है।
पंडित राजेश शर्मा के लिए उन बच्चों का उत्साह भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जिन्हें बड़े मंच पर गरबा खेलने का अवसर मिल रहा है, जितना उन परिवारों की खुशी, जो अपने बच्चों को उत्सव में भाग लेते देखकर गर्व महसूस करते हैं।
आराध्य गरबा का मूल संदेश भी यही है—भक्ति के साथ संस्कृति, भव्यता के साथ अपनत्व और उत्सव के साथ समाजसेवा। धमतरी के हर परिवार के चेहरे पर मुस्कान लाने का संकल्प ही इस आयोजन की सबसे बड़ी पहचान बनता जा रहा है।



